अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस का आयोजन

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अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के उपलक्ष्य में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार द्वारा जननायक कर्पूरी ठाकुर सभागार, पटना संग्रहालय में बिहार के प्राचीनतम बौद्ध विहार तेल्हाड़ा, उत्खनित पुरातात्विक स्थल से संबंधित छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। इस छायाचित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन मंत्री, श्री शिवचन्द्र राम जी के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री चैतन्य प्रसाद, प्रधान सचिव, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग थे।
यह ज्ञातव्य है तेल्हाड़ा, एकंगरसराय, नालंदा जिला स्थित पुरातात्विक स्थल है। इसके उत्खनन का कार्य वर्ष 2009 से 2014 तक डाॅ0 अतुल कुमार वर्मा के निर्देशन में किया गया। इस स्थल से कुषाण कालीन बौद्ध विहार की संरचनाओं की प्राप्ति हुई है। 26 दिसम्बर, 2009 में माननीय मुख्यमंत्री, श्री नीतीश कुमार द्वारा इस स्थल पर उद्घाटन कार्य की विधिवत् शुरुआत की गई थी।
इस उपलक्ष्य पर अन्य कार्यक्रम की सूची में ‘पटना संग्रहालय के पुरावशेष’ के विषय पर डाॅ0 एस0एस0 विश्वास (भूतपूर्व निदेशक, राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली), डाॅ0 अमितेश्वर झा (निदेशक (शोध), भारतीय न्युमिस्मैटिक हिस्टोरिकल एण्ड कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन, मुम्बई) एवं प्रोफेसर इमतियाज अहमद (खुदा बख्श ओरियंटल लाइब्रेरी, पटना) द्वारा व्याख्यान दिया गया।
इस अवसर पर स्कूली बच्चों द्वारा चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। संग्रहालय दिवस पर बनाए गए चित्र बच्चों की कलात्मकता के परिचायक रहे।
छायाचित्र प्रदर्शनी देखने आए पर्यटकों के लिए इस प्रकार का आयोजन उत्सुकतापूर्ण था। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा यह सफल आायोजन लोगों में संग्रहालय एवं पुरातत्व में रूचि को प्रदर्शित करते हैं।
इस अवसर पर विभागीय पदाधिकारी श्री आनन्द कुमार, (आई0आर0एस0), श्री राजकुमार झा (संयुक्त सचिव-सह- निदेशक, संग्रहालय), श्रीमती मीना कुमारी (उप सचिव, पुरातत्व), डाॅ0 सत्येन्द्र झा (संरक्षण पदाधिकारी), डाॅ0 अरविन्द महाजन (क्षेत्रीय निदेशक, संग्रहालय) आदि उपस्थित रहे।


देश की सभ्यता एवं संस्कृति जानने के लिये संग्रहालय का भ्रमण आवश्यक

अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर पटना संग्रहालय, पटना में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए श्री शिवचन्द्र राम ने कहा कि देश एवं राज्य की सभ्यता एवं संस्कृति जानने के लिये संग्रहालय का भ्रमण आवष्यक है। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए संग्रहालय के भ्रमण की योजना चलाई जा रही है। आयोजन के मुख्य अतिथि श्री चैतन्य प्रसाद, प्रधान सचिव, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने बताया कि संग्रहालयों के शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने एवं इसकी शैक्षणिक महत्व को रेखांकित करने हेतु हम लगातार विद्वानों के व्याख्यान का आयोजन कर रहे है। इस अवसर पर मंत्री महोदय ने राज्य के शोध छात्रों के बीच अध्ययन सामग्री का वितरण भी किया। आगत अतिथियों का स्वागत डा० शंकर सुमन, सहायक संग्रहालयाध्यक्ष, पटना संग्रहालय ने किया।
इस अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान माला में बोलते हुए डा० एस०एस० विश्वास, पूर्व महानिदेशक, राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली ने राष्ट्रीय स्तर पर मृण्मूर्तियों की महत्ता का उल्लेख करते हुए पटना संग्रहालय की मृण्मूर्तियों पर प्रकाश डाला। डा० विश्वास ने बताया कि सैन्धव सभ्यता के काल से ही देश में बड़े पैमाने पर मृण्मूर्तियों का निर्माण प्रारंभ हो गया था, जो आज तक जारी है। पटना संग्रहालय, पटना में हड़प्पा संस्कृति के मृणमूर्तियों का एक अच्छा संग्रह है। मौर्यकाल की मृण्मूर्तियों का जैसा संग्रह पटना संग्रहालय में है वैसा संग्रह देश-विदेश के किसी भी संग्रहालय में नहीं है। इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए डा० उमेश चन्द्र द्विवेदी, पूर्व निदेशक, संग्रहालय, बिहार ने बताया कि ये मृण्मूर्तियाँ सामान्य जनता के अतिरिक्त प्रशिक्षित कलाकारों के द्वारा भी बनाये जाते थे। डा० अमितेश्वर झा, निदेशक (शोध), भारतीय न्यूमिस्मैटिक हिस्टोरिकल एण्ड कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन, मुम्बई ने पटना संग्रहालय में के पंचमार्क सिक्कों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रांरभ में विद्वानों की धारणा थी कि ये सिक्के व्यवसायी संगठनों के द्वारा जारी किये गये थे, परन्तु अब अध्ययन से यह आभाष होता है कि ये सिक्के भी तत्कालीक राजाओं एवं जनपदों द्वारा जारी किये गये थे। डा० इमित्याज अहमद, पूर्व निदेशक, खुदाबख्श ओरियंटल लाइब्रेरी, पटना ने बताया कि मध्यकाल में भारत में चित्रकला को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया एवं मुगल राजाओं के द्वारा इन कलाकारों को विशेष रुप से प्रोत्साहन दिया गया। प्रारंभिक मुगल कलाकारों पर ईरानी कला का प्रभाव था। परन्तु धीरे-धीरे यह पूर्णरुपेण भारतीय बन गया। उन्होंने बताया कि व्यक्ति विशेष के चित्र का निर्माण अकबर के समय में प्रारंभ हुआ एवं जहाँगीर के समय में विकसित हुआ। वस्तुतः जहाँगीर का शासन काल मुगल चित्रकला का सर्वोत्तम काल था जिसमें मनुष्य के अतिरिक्त पशु-पक्षियों एवं प्राकृतिक दृष्यों का भी अद्भुत चित्रण किया गया है। इस सत्र की अध्यक्षता डा० अरविन्द महाजन, क्षेत्रीय उप निदेशक, संग्रहालय, पटना ने की।
इस अवसर पर मंत्री द्वारा पुरातत्व निदेशालय द्वारा तेल्हाड़ा उत्खनन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। तेल्हाड़ा, एकंगरसराय, नालंदा जिला स्थित पुरातात्विक स्थल है, जिसके उत्खनन का कार्य वर्ष 2009 से 2014 तक डाॅ0 अतुल कुमार वर्मा के निर्देशन में किया गया। इस स्थल से कुषाण कालीन बौद्ध विहार की संरचनाओं की प्राप्ति हुई है। 26 दिसम्बर, 2009 में मुख्यमंत्री, श्री नीतीश कुमार द्वारा इस स्थल पर उद्घाटन कार्य की विधिवत् शुरुआत की गई थी।
इसके साथ ही स्कूली बच्चों द्वारा चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 55 स्कूली छात्र-छात्राओं ने चित्रांकन प्रतियोगिता में भाग लिया, संग्रहालय दिवस पर बनाए गए चित्र बच्चों की कलात्मकता के परिचायक रहे।
इस अवसर पर डा० उमेशष चन्द्र द्विवेदी, पूर्व निदेशक, संग्रहालय, बिहार, डा० जय प्रकाश नारायण सिंह, पूर्व निदेशक, संग्रहालय, बिहार, डाॅ0 अरविन्द महाजन, क्षेत्रीय निदेशक, संग्रहालय, पटना, डा० शिव कुमार मिश्र, शोध सहायक, पटना संग्रहालय, डा० अशोक कुमार सिन्हा, वरीय तकनीकी सहायक, संग्रहालय, पटना, डा0 अमिताभ राय, तकनीकी सहायक, पटना संग्रहालय, सुश्री प्रीति कुमारी, मुद्रातत्वविद्, श्री मनीष कुमार, तकनीकी सहायक, पटना संग्रहालय, सुश्री रीता कुमारी, तकनीकी सहायक, जननायक कर्पूूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय, पटना, श्री ऋषिकान्त चतुर्वेदी, पटना संग्रहालय, सुश्री फुहार बाली, तकनीकी सहायक, पुरातत्व निदेशालय एवं श्री हर्ष रंजन कुमार, तकनीकी सहायक, पुरातत्व निदेशालय, बिहार, सुश्री मोमिता घोष, संग्रहालयाध्यक्ष, श्री रणवीर सिंह राजपूत, संग्रहालयाध्यक्ष, बिहार संग्रहालय, पटना आदि उपस्थित थे।