अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक संदेश का लगा तांता

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पटना – जदयू ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर जताया शोक

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी ने 93 वर्ष की उम्र में नई दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में लम्बी बिमारी के बाद अंतिम सांस ली। स्व0 वाजपेयी के निधन पर जदयू पार्टी के प्रदेश कार्यालय में शोक-सभा का आयोजन किया गया। जिसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह ने श्रद्धासुमन अर्पित करने के उपरान्त अपना उद्गार व्यक्त करते हुये कहा कि आज के युग में एक व्यक्ति एक साथ इतना बड़ा राजनेता हो और मिलने पर लगता हो कि वो विपक्षी दल का नेता नहीं बल्कि राष्ट्र की आत्मा की आवाज हो, यह अटल बिहारी वाजपेयी में दिखलाई देता था। मुझे उनसे नजदीक से मिलने का मौका मिला है, एक प्रधानमंत्री के रूप में लोकसभा में उन्हें देखने का मौका मिला है और राज्यसभा में उनके उपस्थिति में कुछ बोलने का मौका भी मिला है। पक्ष या विपक्ष से अच्छा बोलने वालों के प्रति वे कायल रहते थें।

साथ ही उन्होंने कहा कि देश ने एक महान नेता खो दिया। स्व0 वाजपेयी को किसी खास दल का नेता कहना सही नहीं होगा। वह देश के सभी दलों के लिये खास थें। ऐसे व्यक्तित्व वाले लोग धरती पर विरले ही जन्म लेते हैं। शोक-सभा में श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘‘ललन’’, मंत्री कृष्णनन्दन वर्मा, नागालैण्ड जद (यू0) के प्रदेश अध्यक्ष सेनचुमो लोथा, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अफाक अहमद खान, राष्ट्रीय सचिव सह् स0वि0स0 रामसेवक सिंह, स0वि0प0 संजय कुमार सिंह, स0वि0प0 सह कोषाध्यक्ष प्रो0 रणवीर नंदन, स0वि0स0 हेमनारायण साह, स0वि0स0 अभय कुशवाहा सहित सैंकड़ों गणमान्य नेता/कार्यकर्तागण मौजूद थें।

राष्ट्रीय जनता दल ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया

भारत के पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव, पूर्वमंत्री तेजप्रताप यादव, राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने गहरी शोक सम्वेदना वयक्त की और अपने शोक संदेश में कहा कि उनके निधन से भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। अटल जी उच्च कोटि के राजनेता, दार्शनिक, चिंतक और कवि थे। उनके निधन से देश ने एक महान नेता को खो दिया है। ईश्वर उनकी आत्मा को चिर शांति दे।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर हम पार्टी ने जताया शोक

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष वह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी ने शोक जताते हुए उनके प्रति अपना श्रद्धा सुमन अर्पित की| उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा कि भारत के इतिहास में आजादी के इतने दिनों बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी के निधन से पूरे देश के हर वर्ग और समाज के लोग शोकाकुल व मर्माहत है| ऐसा किसी देश में कम ही देखने को मिलता है जिनके निधन से पूरा देश शोकाकुल हो| अटल बिहारी वाजपेई जी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे| उनके निधन से राष्ट्र ने एक अमूल धरोहर को खो दिया| जिसकी भरपाई होना असंभव है|

आज एक युग का अंत हो गया – डाॅ॰ प्रेम कुमार

बिहार के कृषि विभाग मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आज एक युग का अंत हो गया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी के निधन से देश ने न केवल एक महान जननायक खोया है, अपितु देश के एक प्रख्यात कवि और जनमानस के लोकप्रिय नेता को खो दिया है। अटल बिहारी बाजपेयी विश्व के एक मात्र नेता थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में अपनी मातृभाषा में देश के हितों को रखा था और समस्त विश्व के नेताओं ने उनके इस स्वाभिमान भरे भाषण को हृदय से सराहा था। वे दलगत राजनीति से ऊपर के सर्वमान्य नेता थे। उनके दिये गये भाषणों में कभी कटुता नहीं झलकती थी। वे कहते थे कि वैचारिक मतभेद हो सकता है, परन्तु मनभेद नहीं हो सकता। आज बाजपेयी जी की नीति पर चलते हुए कश्मीर की समस्या का समाधान उनके विचार ‘‘जमहुरियत, कश्मीरियत और इंसानियत’’ के बल पर किया जा सकता है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र के संबोधन में किया।

वाजपेयी जी का दुःखद निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति – लोजपा

देश के पूर्व लोकप्रिय पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी पाजपेयी जी के असामायिक निधन पर लोक जनशक्ति पार्टी द्वारा शोक सभा आयोजित की गयी इस शोक सभा में लोक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री बिहार पशुपति कुमार पारस ने कहा कि अटल विहारी वाजपेयी जी पहले गैर कांग्रेसी और रा0ज0ग0 के ऐसे प्रधानमंत्री थे कि उन्होने अपनी छवि और कार्यशैली से बिना किसी समस्या के पाँच साल पूरे किये उन्होने चैबिस दलों के गठबंधन से सरकार बनायी थी और वह सरकार काभी लोकप्रिय सरकार थी। वाजपेयी देश के ऐसे प्रथम प्रधानमंत्री थे जो प्रख्यात कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे, वाजपेयी भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे थे।

वाजपेयी कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादक भी रहे थे। आज वाजपेयी के निधन से पूरे देष में शोक की लहर पैदा हो गयी है, वाजपेयी एक ऐसी शख्सीयत थे जिन्होने भारतीय राजनीति के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। पचास सालों की संसदीय राजनीति में एक पार्टी बनाना , पार्टी को दो से दो सौ तक के आंकड़े तक पहूँचाना, लोकतांत्रिक व्यवस्था में खुद की जमानत बचाने से लेकर बिखर रही सरकार को बचाना और जनता का समर्थन लेकर पार्टी को फिर से आसमान तक पहूँचाना कोई आसान काम नही है लेकिन वाजपेयी ने अपने कर्तव्यों से लोकतंत्र की ललाट पर अपने विजय की कहानी खुद लिखि जो अपने आप में अविस्मरनीय और ऐतिहासिक है।

राजनीति के पुरोधा उठ गये – सदानंद सिंह

बिहार कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर दुःख एवं गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है| सिंह ने अपने शोक सन्देश में कहा कि राजनीति के पुरोधा हमारे बीच से उठ गये| स्व. वाजपेयी जी ऐसे निर्विवाद नेता थे जो भाजपा में रहकर भी सभी दलों में सम्माननीय थे| वे हमेशा उच्च स्तर की राजनीति किये| निम्न स्तरीय राजनीति को कभी तरजीह नहीं दी| वे सदा राजधर्म का पालन किये| उन्होंने 1971 में भारत – पाकिस्तान के युद्ध से बंगला देश के निर्माण के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गाँधी जी को ‘दुर्गा’ की उपाधि दी थी| उन्हें कांग्रेस सरकार ने विपक्ष का नेता होते हुए भी अपना प्रतिनिधि बनाकर यूएनओ भेजी थी| वे राजनीति के एक युग पुरुष थे| उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है| ईश्वर उनकी आत्मा को चिर शांति प्रदान करें एवं उनके परिजनों को इस दुःख की बेला में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करें|