अटल बिहारी वाजपेयी ने सुशील मोदी को राजनीति में आने का दिया था औपचारिक आमंत्रण

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पटना – 13 अप्रैल 1986 को सुशील कुमार मोदी के विवाह के अवसर पर वर-वधू को आशीर्वाद देने अटल बिहारी वाजपेयी पटना आए थे। उस समय उन्होंने विवाहोत्सव में सम्मिलित स्वजनों और पारिवारिक मित्रों के बीच आत्मीयतापूर्ण भाषण किया और सुशील मोदी को मुख्यधारा की राजनीति में आने का औपचारिक आमंत्रण दिया। अटल बिहारी वाजपेयी ने भाषण के दौरान कहा था ;

देवियों और सज्जनों,

आशीर्वाद देने के लिए पहले ऐसे लोग बुलाए जा रहे हैं, जो कभी विवाह के बंधन में बंधे ही नहीं। इसलिए मैं आशीर्वाद देने की औपचारिकता नहीं करूंगा, मैं इस अवसर पर अपना आनंद प्रकट कर रहा हूं। यह एक अनूठा प्रसंग बन गया है। उत्तर और दक्षिण का मिलन हो रहा है। अंतरप्रातीय, अंतरभाषीय, अंतर उपासना पद्धतीय इस विवाह में वधू केरल की है। केरल के निकट ही कुमारी कन्या सदियों से साधना करती रही है। पाटलिपुत्र हिमालय से जुड़ा हुआ है, हिमालय के सिर पर कन्याकुमारी की दृष्टि रही है। यह प्रेम पहले हुआ है, विवाह बाद में हुआ है।

उन्होंने कहा था कि पंडितजी ने ठीक कहा था कि विवाह के बाद प्रेम हो जाए वो भी ठीक है, लेकिन अगर प्रेम की परिणति विवाह में हो जाए तो बहुत अच्छा है। मैं बधाई देना चाहता हूं, विशेष कर ऐसे परिवारों को, जिसमें लड़के-लड़की इकट्ठा होकर विवाह कर लेते हैं।

वाजपेयी ने आगे अपने भाषण में कहा था कि सुशील जी ने अंततोगत्वा विवाह का फैसला किया ही, यह अपने में ही एक महत्वपूर्ण बात है। वो अभी तक संघर्ष करते रहे, लेकिन इस विवाह को परिवारों ने माना, इसमें शामिल हैं, आनंदित हैं, आज इतने बड़े समारोह में हम सब आनंदपूर्वक भाग लेने के लिए इकट्ठा हुए, यह अपने में एक बड़ी बात है।

समाज कुरीतियों में जकड़ा हुआ है, प्रेमियों के बीच भी दीवारें खड़ी कर दी जाती है। जो उन दीवारों को तोड़कर विवाह करते हैं, उन्हें परिवारों की मान्यता नहीं मिलती, समाज का आशीर्वाद नहीं मिलता है, लेकिन इस विवाह को समाज का पूरा आषीर्वाद प्राप्त है। इस दृष्टि से यह विवाह आगे के लिए पथ-प्रदर्शक बनेगा, यह मैं कामना करता हूं।

उन्होंने यह भी कहा था कि वे एक और स्वार्थ से विवाह में सम्मिलित होने आए हैं। अब सुशील जी विद्यार्थी नहीं रहे और उनकी पत्नी, वो तो पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा “मैं उन्हें निमंत्रण दे रहा हूं कि वो हमेशा कर्मक्षेत्र में रहे हैं, संघर्ष के क्षेत्र में रहे हैं, विद्यार्थी परिषद की उन्होंने काफी सेवा की, अब अगर वो उपयुक्त समझें तो राजनीतिक क्षेत्र में आकर हम लोगों का हाथ बंटाएं।”