अनंत सिंह ने पुलिस को खुली चुनौती देते हुए कहा कि आप हमें अरेस्ट नहीं कर सकते

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मोकामा के बाहुबली विधायक विधायक अनंत सिंह की चर्चाएं और उनके किस्से अनंत सिंह के नाम की तरह ही अनंत है। नेताओं के संरक्षण में रहने वाले अनंत सिंह ने अपने साम्राज्य में कई कारनामे किए हैं। कई दलों के नेता अनंत सिंह के पनाह और संरक्षण में रहे। बिहार के सुशासन की ढोल पीटने वाली सरकार नीतीश कुमार भी अछूते नहीं रहे। कई बार नीतीश कुमार ने भी अनंत सिंह की मदद ली और कई बार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अंनत सिंह के सामने हाथ जोड़ते नज़र आये। अनंत सिंह की महफ़िल हो और नेता मौजूद न ऐसा हो नहीं सकता था।

अनंत सिंह की दोस्ती की शुरुआत

अनंत सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती की नींव साल 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ी थी। उस समय नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद थे। नीतीश के खिलाफ आरजेडी-लोजपा ने बाहुबली सूरजभान को मैदान में उतारा था। उस चुनाव में अनंत सिंह ने नीतीश की खूब मदद की इसके बाद नीतीश कुमार और अनंत सिंह की दोस्ती परवान चढ़ता गया।

अनंत सिंह का राजनीतिक दुनिया में कदम

अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बनने के बाद अनंत सिंह ने सियासी गलियारों में भी अपनी पैठ बनानी शुरू कर की, 2005 में वह मोकामा से जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीत गए। इसके बाद साल 2010 में भी वह जेडीयू के टिकट पर मोकामा से विधायक चुने गए।

नीतीश कुमार के संरक्षण में बढ़ा अनंत का दबदबा

पहले से अपराध जगत के बेताज बादशाह और छोटे सरकार कहे जाने वाले अनंत सिंह यहीं नहीं रुके। अनंत सिंह ने राजीनतिक संरक्षण मिलने के बाद कई मामलों में पुलिस अनंत सिंह पर कार्रवाई करने से परहेज करने लगी।

2007 शिल्पी हत्या कांड

साल 2007 में एक महिला से दुष्कर्म और हत्या के केस में बाहुबली विधायक का नाम आया था। जब इसके बारे में एक निजी समाचार चैनल के पत्रकार उनका पक्ष जानने पहुंचे तो सत्ता के नशे में चूर विधायक और उनके गुंडों ने पत्रकार की जमकर पिटाई की,इस मामले में सुशासन बाबू की कहे जानी वाली सरकार नीतीश कुमार को भारी फजीहत झेलनी पड़ी थी। तब विवश हो कर अंनत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

2015 कांड

साल 2015 में भी ऐसी ही एक और घटना सुर्खियां बनी जब अनंत सिंह के करीबी किसी महिला पर मोकामा के पास बाढ़ बाजार इलाके में चार युवकों ने छेड़खानी कर दी। इसके बाद विधायक के घर से निकले समर्थकों की टोली ने उन लड़कों को सरे बाजार उठा लिया। लेकिन, बढ़ते दबाव से मजबूर पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करनी पड़ी। जब पुलिस लड़कों की तलाश में उनके गांव पहुंची तबतक पिटाई के कारण उनमें से तीन की हालत गंभीर हो गई थी।

इस मामले में पुलिस ने विधायक के कई समर्थकों को भी हिरासत में लिया। जबकि एक युवक की दर्दनाक तरीके से हत्या कर दी गई थी। उसका शव पास के जंगल से बरामद किया गया था। इस घटना की गूंज पूरे बिहार में सुनाई दी। पुलिस के पास इस घटना में अनंत सिंह की संलिप्तता के कई सबूत थे लेकिन उनकी गिरफ्तारी को रोकने के लिए राजनीतिक दबाव पड़ रहा था। इसलिए, बाहुबली विधायक की गिरफ्तारी को लगातार टाला जाता रहा।

लेकिन 24 जून को आखिरकार अनंत सिंह को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी इतनी आसान नहीं थी। इस मामले में अनंत सिंह को गिरफ्तार करने का मन बना चुके तत्कालीन एसएसपी जितेंद्र राणा का शासन ने तबादला कर दिया। लेकिन 23 जून को तबादले की भनक लगते ही राणा ने प्रेस कांफ्रेंस कर इस केस से जुड़ी सारे तथ्य सार्वजनिक कर दिए। इसके बाद 24 जून को राणा की जगह नवनियुक्त एसएसपी विकास वैभव ने चार्ज संभालते ही अनंत सिंह के घर का सर्च वारंट लेकर कई जिलों की फोर्स इकठ्ठा की।

इसके बाद पुलिस ने विकास वैभव के नेतृत्व में कई जगहों पर छापेमारी कर शाम को अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। रात को ही उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में पटना के बेऊर जेल भेज दिया गया।

अनंत सिंह से अलग हुए नीतीश

साल 2015 के शुरुआती दौर में ही अनंत सिंह के बुरे दिन शुरू हो गए। चुनाव में लालू की पार्टी आरजेडी से गठबंधन के कारण जेडीयू ने सियासी नुकसान को देखते हुए अनंत सिंह का टिकट काट दिया। हालांकि अनंत सिंह निर्दलीय चुनाव में उतरे और जीत हासिल की।

अनंत सिंह की मुश्किलें नहीं हुई कम

इसके बाद भी अनंत सिंह अपने आदतों से बाज़ नही माने, अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला सख्स इतिहास के पन्नों पर एक नया आयाम स्थापित करने की ललक में फिर से कानून के शिकंजे में जा फंसा।

इस बार मामला मामला पंडारक का जहा नामी-गिरामी व्यवसायियों भोला सिंह और मुकेश सिंह की हत्या की सुपारी देने के मामले में अनंत सिंह का नाम सामने आया था। हत्या की सुपारी मामले में एक ऑडियो वायरल हुआ था। पुलिस ने इस मामले में अनंत सिंह को पुलिस मुख्यालय के विधि विज्ञान प्रयोगशाला बुलाया गया। लेकिन पुलिस ने जांच के बाद मामले को सुरक्षित रखा।

इसके बाद ही 16 अगस्त शुक्रवार की सुबह अनंत सिंह के बाढ़ थाना छेत्र के लदमा आवास से अनंत सिंह के घर पुलिस ने गुप्त सूचना पर छापेमारी करते हुए AK-47 एक लोडेड मैगज़ीन जिसमे 22 जिंदा कारतूस और 2 हैंड ग्रेनेड बरामद किया था।इस आधार पर पुलिस ने अनंत सिंह को अभियुक्त बनाते हुए UAP एक्ट 13 के तहत एफआईआर दर्ज किया था। रविवार को पुलिस ने एसआईटी टीम गठन करते हुए ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में छापेमारी की, लेकिन अनंत सिंह को पुलिस की छापेमारी की भनक मिलते ही अपने सरकारी आवास से फरार हो गए थे।

फरारी से सरेंडर तक

अनंत सिंह पिछले 6 दिनों से पुलिस के आंखों में धूल झोकते हुए दिल्ली जा पहुंचे और साकेत कोर्ट में दोपहर करीब 1 बजे सरेंडर कर दिया। इस दौरान अनंत सिंह ने अपना 3 वीडियो जारी किया।इस पूरे घटनाक्रम के के दौरान अनंत सिंह ने अपने ऊपर साजिश का आरोप लगाया।

अनंत सिंह ने वायरल वीडियो में कहा कि ये सारा खेल ललन सिंह का है। ललन सिंह, नीरज सिंह और एसएसपी लिपि मीटिंग कर के मेरे घर हथियार को रखवा दिया है।अनंत सिंह ने कहा कि हम ललन सिंह के खिलाफ लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़ा था। इसी बात के लिए सताया जा रहा है। अनंत सिंह ने अपने 3 वायरल वीडियो में पुलिस को चैलेंज किया था कि मैं पुलिस के हाथ नही सरेंडर करूँगा, मुझे पुलिस पर भरोसा नहीं। मैं कोर्ट में सरेंडर करूंगा। फिलहाल अनंत सिंह को बाढ़ एएसपी के साथ 15 सदस्यीय टीम रिमांड पर लेने के लिए रवाना हो चुकी है।

बिहार पुलिस पर बड़ा सवाल

अनंत सिंह के लदमा गांव में छापेमारी होने के बाद पुलिस ने AK-47 और अन्य घातक विस्फोटक बरामद किया था। उसके बाद पुलिस अलर्ट क्यों नहीं हुई। जिस समय अनंत सिंह मीडिया को अपनी बेगुनाही की सफाई दी रहे थे तब पुलिस ने एक्शन क्यों नही लिया? आखिर किसके कहने पर पुलिस दो दिनों तक इंतजार करती रही। UAP एक्ट लगने बाद भी पुलिस क्यों सोई रही? पुलिस जिस प्रकार अनंत सिंह को गिरफ्तार करने के एसआईटी की 11टीम और सैकड़ो पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी आखिर वे विफल साबित क्यों हो गए। कहाँ गई बिहार पुलिस की खुफिया तंत्र?