अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पुराने छात्रावासों के जीर्णोद्धार के साथ ही नए छात्रावासों का निर्माण कराया जा रहा है – मुख्यमंत्री

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पटना – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज अधिवेशन भवन में मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति उद्यमी योजना के शुभारंभ के अवसर पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले मैं उद्योग विभाग को इस बात के लिए बधाई देता हूॅ कि इस नई योजना का शुभारंभ इतने कम समय में कर दिया गया। दो महीने पूर्व इस योजना की रुपरेखा बनी और आज इसकी शुरुआत हुई। 03 हजार आवेदन प्राप्त हुए, उसमें से 500 लोगों का चयन हुआ है, उन्हें प्रशिक्षित करना है। 135 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और 150 लोगों का प्रशिक्षण प्रारंभ हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के लाभार्थियों के लिए न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट है। मुझे खुशी है कि लाभार्थी की योग्यता की लिस्ट जो मैं देख रहा था, उसमें एम0एस0सी0, बी0टेक, बी0एस0सी0, ग्रेजुएट, आई0टी0आई0 जैसे डिग्रीधारियों का चयन हुआ है। ऐसे उद्यमी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के लोगों को प्रेरित भी करेंगे। इसके साथ- साथ पहले से चली आ रही योजनाओं का लाभ भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति के समाज को मिलता रहेगा। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थी को 10 लाख रुपए की राशि मिलेगी, जिसमें से 5 लाख रूपये की राशि विशेष प्रोत्साहन योजनान्तर्गत अनुदान के रुप में उपलब्ध होगा और बाकी के 5 लाख रुपए ब्याज मुक्त ऋण के रुप में 84 किस्तों में अदा करना होगा। यह क़िस्त तब से शुरु होगा, जब उद्योग की शुरुआत हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत विचार-विमर्श कर इस योजना की शुरुआत की गई है। जिन 500 लाभार्थियों का चयन किया गया है उनमें सभी क्षेत्र में कार्य प्रारंभ करने वाले लोग हैं। जैसे- कम्प्यूटर हार्ड डिस्क, आई0टी0, इवेंट मैनेजमेंट, टेंट हाउस, आटा-सत्तु, रेडिमेड गारमेंट, फर्नीचर, जूता इत्यादि। मुझे खुशी है कि अपने राज्य के ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के युवा हर प्रकार की उद्यमिता अपने राज्य में प्रारंभ कर सकेंगे, जिसमें लाभ की गुंजाईश है। अनुसूचित जनजाति समाज की युवा-युवतियाॅ इसे कार्यान्वित कर खुद तो लाभान्वित होंगे ही, साथ ही दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध कराएंगे। सभी जिले से लाभार्थी का चयन हुआ है। मुझे उम्मीद है कि पूरी बुलंदी से आपलोग काम करेंगे और अपने अच्छे प्रदर्शन से आपलोग समाज को प्रेरित करेंगे।

उन्होंने कहा कि जब तक सकारात्मक अवधारणा नहीं होगी, तब तक समाज का विकास नहीं हो सकता है। हमलोगों ने समाज के हर वर्ग के लिए काम किया है। कमजोर वर्गों के प्रोत्साहन के लिए विशेष तौर पर काम किया है। महिलाओं को आगे लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, उसमें भी महादलितों के लिए विशेष तौर पर काम किया गया है। महादलितों के कौशल विकास के लिए काम किया गया। अब महादलितों के लिए मिलने वाली विशेष सुविधा सभी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को भी मिलेगी। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति टोले में सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा है। किसानों के लिए कृषि रोड मैप लाया गया। अपने राज्य में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्टमेंट पॉलिसी लागू किया गया है।

उन्होंने कहा कि समाज के सभी तबकों के लिए काम किया गया है और जो समाज की मुख्यधारा से जो पीछे छूट गए हैं, उन्हें जोड़ने के लिए विशेष तौर से काम किया जा रहा है। राज्य में 93 लाख महिलाएं 8 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह के माध्यम से जुड़कर अनेक क्षेत्रों के लिए काम कर रही हैं। 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य है। वर्ष 2015 में सात निश्चय योजना की शुरूआत की गयी, जिसके अंतर्गत विकास के कई काम किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी का लाभ सभी वर्गों को मिल रहा है लेकिन इस व्यवसाय पर जो लोग निर्भर थे, उनके लिए सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था स्वयं सहायता समूह के माध्यम से की जा रही है ताकि ऐसे परिवारों में खुशहाली आये।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के पुराने छात्रावासों के जीर्णोद्धार के साथ ही नए छात्रावासों का निर्माण कराया जा रहा है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए प्रतिमाह 1000 रूपये की छात्रवृत्ति और मुफ्त में अनाज उपलब्ध कराने की भी योजना है। कुछ लोग नकारात्मक बातें करते हैं और उन्हें ऐसी आदत होती है। मैं सकारात्मक ढंग से काम करने में विश्वास करता हूॅ। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अधिकार को कोई छीन नहीं सकता है। इस धरती पर से आरक्षण कोई खत्म नहीं कर सकता है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार अध्यादेश लाने जा रही है, किसी को परेशान होने की जरुरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ बोलने से अधिकार नहीं मिलता है बल्कि उसके लिए हर जरुरी कदम उठाने पड़ता हैं और सकारात्मक पहल करनी पड़ती है। लोग पढ़ेंगे, तभी आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि 24 नवंबर को सत्ता ग्रहण करने के बाद जब सर्वेक्षण कराया गया तो पता चला कि 12.50 प्रतिशत बच्चे स्कूल से बाहर हैं, उनमें से सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक और दलित समुदाय के बच्चे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय और अनुसूचित जातियों के बच्चों को साक्षर करने के लिए टोला सेवक एवं तालिमी मरकज बहाल किए गए। राज्य में शिक्षा की स्थिति को दुरुस्त करने के लिए 22 से 23 लाख नए स्कूली कमरों का निर्माण भी कराया गया है और लाखों शिक्षकों का नियोजन कराया गया। सरकार और जनता के बीच संवाद स्थापित करने के लिए विकास मित्र का नियोजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे खुशी है कि आज इस योजना की शुरुआत हुई है। उद्योग विभाग से मैं कहना चाहता हूं कि लगातार आवेदन आते रहे, उनका चयन होता रहे और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी बनी रहे। इस संबंध में अगर कहीं कोई परेशानी हो रही है तो उसके लिए प्रस्ताव लाइये। ऐसा तंत्र विकसित कीजिए, जिसमें इससे संबंधित कठिनाईयों का समाधान हो सके। मैं आप लाभार्थियों को शुभकामनायें देता हूं कि पूरी बुलंदी से आपलोग काम कीजिएगा और लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराईयेगा।
मुख्यमंत्री का स्वागत उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ0 एस0 सिद्धार्थ ने सिक्की कला पर आधारित पुष्प-गुच्छ भेंटकर किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान सांकेतिक रुप से 5 चयनित लाभार्थियों- चांदनी कुमारी, दिनेश चैधरी, ममता पासवान, राजकुमार राम को चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों की सूची पर आधारित एक बुकलेट का विमोचन किया।

कार्यक्रम को उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह, भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला, कला संस्कृति मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, विधायक श्याम रजक, विधान पार्षद अशोक चैधरी, उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ0 एस0 सिद्धार्थ ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक प्रभुनाथ राम, विधान पार्षद दिलीप चौधरी, विधान पार्षद रामचंद्र भारती, दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश पासवान, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष विद्यानंद विकल, राज्य महादलित आयोग के पूर्व अध्यक्ष हुलेस मांझी, बिहार राज्य हस्तकरघा बुनकर सहयोग संघ लिमिटेड के अध्यक्ष जनाब नकीब अंसारी, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष के0पी0एस0 केशरी, चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के निदेशक बी0 मुकुंद दास, विकास आयुक्त शशि शेखर शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष वर्मा, बिहार महादलित विकास मिशन के कार्यपालक पदाधिकारी गोपाल सिंह सहित उद्योग विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारीगण एवं अन्य लाभार्थी उपस्थित थे।