अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजन से बिहार में फिल्म उद्योग के विकास की संभावनाएँ जगेंगी – राज्यपाल

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पटना, 22 फरवरी 2017

‘‘भारतीय संस्कृति की साझी विरासत बोधिसत्व अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे आयोजनों से समृद्ध होती है। इस आयोजन से बिहार में भी फिल्म उद्योग के विकास की संभावनाएँ जगेंगी और राज्य के विकास का एक नया प्रक्षेत्र मूर्त रूप ग्रहण करेगा।’’ -उक्त विचार, राज्यपाल श्री राम नाथ कोविन्द ने स्थानीय अधिवेशन भवन के सभागार में अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

राज्यपाल ने कहा कि गीत, संगीत, सिनेमा, नाटक आदि से जुडे सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में भावनात्मक एकता प्रगाढ़ होती है। समाज में शांति, सुव्यवस्था, सद्भावना और नैतिकता की जडे़ं मजबूत हों, इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को जगाए रखें। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विशेषता रही है कि हम पूरी दुनिया को अपना परिवार समझते हैं। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश हम ही ने पूरी दुनिया को दिया है। हमारा देश प्रेम विश्व-बन्धुत्व की ओर हमें स्वाभाविक रूप से प्रेरित करता है।
श्री कोविन्द ने कहा कि इस आयोजन में श्रीलंका, बांग्लादेश जापान, फ्रांस, इरान, अमेरिका, नेपाल आदि देशों की फिल्में दिखाई जा रही हैं तो यहाँ के दर्शक इन फिल्मों के माध्यम से संबंधित देशों की संस्कृति, वहाँ की परम्परा, वहाँ की जीवन-शैली -सारी बातों से परिचित हो रहे हैं। पूरी दुनिया की सांस्कृतिक गतिविधियों का एक दूसरे के साथ आदान-प्रदान होते रहने से विश्व-बंधुत्व और विश्व मानवता की अवधारणा को मजबूती मिलती है। भारत के विभिन्न प्रान्तों की आंचलिक संस्कृतियों की सुगंध समेकित रूप ग्रहण कर भारतीय संस्कृति को भी बहुवर्णी सौन्दर्य प्रदान करती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध फिल्म निर्माता श्री गोविन्द निहलानी ने कहा कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, इससे व्यक्ति की सोच, संवेदना और सांस्कृतिक चेतना भी विकसित होती है। कार्यक्रम में बोलते हुए श्री अडूर गोपालकृष्णन ने कहा कि बिहार की विरासत इतनी समृद्ध है कि फिल्मकार इसकी ओर स्वतः आकर्षित होंगे। कार्यक्रम में श्री अनंत गोयनका ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में स्वागत-भाषण फाऊन्डेशन की अध्यक्षा श्रीमती स्नेहा ने किया, जबकि धन्यवाद-ज्ञापन श्री गंगा प्रसाद ने किया। कार्यक्रम में श्री त्रिपुरारि शरण, श्रीमती पंकजा ठाकुर आदि भी उपस्थित थे।