अपनी मांगों को लेकर बिहार के भूतपूर्व सैनिकों ने किया एक दिवसीय उपवास

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पटना – बिहार सरकार द्वारा उपेक्षा का दंश झेल रहे राज्‍यभर के हजारों भूतपूर्व सैनिक आज राजधानी पटना के गर्दनीबाग स्थिल धरना स्‍थल पर एक दिवसीय उपवास सह धरना का आयोजन कर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। इसमें प्रदेशभर के सैकड़ों पूर्व सैनिक शामिल हुए। इस दौरान गैर राजनीतिक अखिल भारतीय भूतपूर्व सैनिकों के संगठन वेटरन इंडिया के बिहार प्रदेश अध्‍यक्ष कमलेश कुमार द्विवेदी और वेटरन इंडिया बिहार राज्‍य के महासचिव राकेश रंजन (पूर्व मरीन कमांडो) ने कहा कि वर्तमान सरकार ने बिहार के भूतपूर्व सैनिकों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है।

उन्‍होंने बिहार में जिला सैनिक बोर्ड के गठन का मांग करते हुए कहा कि जिस तरह से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं को जमीन पर लागू करने और डाटा के साथ रोजगार के आदान प्रदान का कार्य करती है। बिहार में भी यह लागू किया जाय। बिहार में इसी एच पॉलिक्लिनिक स्‍थापना हो, जो देश के हर जिले में प्राथमिक चिकित्‍सा और रेफरल का कार्य करती है। यह अकेले दिल्‍ली जैसे 7 राज्‍य में 50 से अधिक हैं, जबकि बिहार में मात्र 10 ही हैं। बिहार में कैंटीन भी 5 जिले में ही है। बांकी जगहों पर इसकी सुविधा नहीं है। उन्‍होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों की मांग ये भी है कि रोजगार में आरक्षण, भूतपूर्व सैनिकों के बच्‍चों को उच्‍च पढ़ाई में आरक्षण और प्रशिक्षित, ईमानदार, मेहनती और अनुशासित वेटरंस का उचित उपयोग हो।

उन्‍होंने सैप जवानों को नियमित और पूर्ण वेतनमान देने की मांग की। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान सैलरी 17250 रूपया है, जो वर्तमान में एक होम गार्ड से भी कम है। जिन सैनिकों ने एके 47 और एके 56 जैसे हथियारों को लेकर प्रदेश के दुर्दांत अपराधियों और नक्‍सलियों का मुकाबला जान जोखिम में डाल कर बिहार के मुख्‍यमंत्री को मेडल दिलाया और आज उन्‍हीं के साथ दोयम दर्जे का व्‍यवहार किया जा रहा है। यह उचित नहीं है। उन्‍होंने बीएमपी – 16 के पुर्नगठन की भी मांग की और कहा कि 1000 की संख्‍या वाले इस इकलौते भूतपूर्व सैनिक इस ब्‍लॉग की संख्‍या 180 मात्र की रह गई है। इसमें राज्‍य सरकार कोई नियुक्ति नहीं कर रही है। इसके अलावा भूतपूर्व सैनिक जिला प्रशासन की उपेक्षा के शिकार हैं और शहीद के परिवार की भी अनदेखी हो रही है। इस पर सरकार ध्‍यान दे और हमारे मांगे पूरी करे। उन्‍होंने बताया कि अब 11 फरवरी सोमवार को भूतपूर्व सैनिकों का एक शिष्‍टमंडल बिहार सरकार के अधीन सैनिक कल्‍याण निदेशालय को भी मुख्‍यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगा।

उन्‍होंने कहा कि अगर उनकी मांगों की अनदेखी हुई तो भूतपूर्व सैनिक आने वाले दिनों में बड़ी लड़ाई लड़ने पर विवश हो जायेंगे। उन्‍होंने कहा कि बिहार राज्‍य में करीब एक लाख पचास हजार भूतपूर्व सैनिक हैं, लेकिन राज्‍य सरकार का रवैया हमारे प्रति हमेशा उदासीन रहा है। एक और जहां देश के अन्‍य राज्‍यों में भूतपूर्व सैनिकों को हर मुमकिन सुविधा मुहैया कराया जाता है, वहीं बिहार में हमारे कल्‍याण के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। बदलते विधि – व्‍यवस्‍था के बाद भूतपूर्व सैनिक बिहार आकर रहने लगे। लेकिन अब हम सरकार के उदासीन रवैये के कारण ठगा महसूस कर रहे हैं।

वेटरन इंडिया बिहार के उपाध्‍यक्ष अजय कुमार ने कहा कि पूरे देश में बिहार ही एक ऐसा राज्‍य है, जहां भूतपूर्व सैनिक उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। केंद्र सरकार के द्वारा बनाए गए नीति को भी बिहार में सही से लागू नहीं किया जा रहा है। इस कारण हमें कोई लाभ नहीं मिल पाता है। इस वजह से जीवन का सबसे बहुमूल्‍य समय देश सेवा में देने के बाद सेवानिवृत होने पर बहुत सारी क‍ठनाइयों का समाना करना पड़ता है। उपवास में गोपाल मिश्रा, आर डी सिंह, सुनील कुमार, सदन मोहन, मिथिलेश कुमार, संजीव संत समेत अन्‍य भूतपूर्व सैनिक भी मौजदू रहे।