अपनो ने ही डाल दिए पैरों में जंजीर

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गया: इलाज के बदले अपनों ने ही डाल दी हाथ और पैरों में लोहे की जंजीर, मानसिक संतुलन खो जाने के बाद जंजीरों से किया गया कैद।

गया के बिथोशरीफ में मानसिक संतुलन खो चुके 2 लोगों को लोहे की जंजीरों में बाँध कर जानवरो की तरह रखा गया है। आज हम भले की डिजिटल क्रांति युग में जी रहे हैं लेकिन आज भी अन्धविश्वास का मकड़जाल इस तरह फैला है कि अपने ही लोगों ने अपने परिजन को लोहे की जंजीरों में कैद कर लिया है। जंजीरों में कैद बृद्ध के हाथों और दोनों पैरों में जकड़ कर दीवार से जंजीर को बांध कर रखा गया है। इनलोगों का विश्वास है कि 40 दिनों तक यहां बांध कर रखने से यह ठीक हो जायेगा और उसके बाद किसी मानसिक रोग चिकित्सक के पास इलाज कराएँगे। इंसान होकर इंसानों के साथ मानवीय अत्याचार कर कैसे इलाज में लगे हैं बताना मुश्किल है। बंधे हुए वृद्ध  ने बताया कि उसे लोग मारते भी हैं वंहीं परिजन कहते हैं कि घर में लड़ाई-झगडा किया करता था तब पता चला कि शैतानी हरकत है इसलिए जंजीरों में कैद कर यहां लाया गया है।

इस सम्बन्ध में सुप्रसिद्ध मनोरोग चिकित्सक चौधरी लक्ष्मी नारायण ने बताया कि मानसिक रोगी को इस तरह से जंजीर से बाँधना कानूनन जुर्म है और रोगी पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है, बताया कि ज्यादा दिनों तक अगर ऐसे बाँध कर रखा जाता है तो इलाज में रोगी को सामान्य स्थिति में लाने में काफी लंबा समय लगता है। खासकर मानसिक रोग में लोग आज भी ओझा-गुनी के चक्कर में पड़ जाते हैं  क्यूंकि जागरूकता की कमी है।