अपसंस्कृति से बचाव हेतु लोक संस्कृति और साहित्य की रक्षा बेहद जरूरी- सत्य पाल मलिक

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पटना- ‘‘बिहार में अनेक लोक गाथाएँ प्रसिद्ध हैं। लोक-परम्परा में नारियों का सम्मान आरंभ से ही रहा है। ‘बाजारवाद’ और ‘अपसंस्कृति’ के दौर में भी लोक साहित्य की धारा को आज समाज में अधिक-से-अधिक प्रतिष्ठा दिलाने की आवश्यकता है, जिसके लिए निश्चय ही साहित्यकारों को आगे आना चाहिए।’’ -उक्त उद्गार, बिहार के महामहिम राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने ‘नई धारा’ साहित्यिक पत्रिका द्वारा आयोजित ‘उदयराज सिंह स्मृति सम्मान समारोह’ को मुख्य अतिथि-सह-अध्यक्ष पद से संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता, समानता और बंधुता-हमारे संविधान और जीवन-दर्शन की मूल भावना हैं। हमारा साहित्य-दर्शन भी इसी पर केन्द्रित है। हमारे साहित्यकार स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के सिद्धांत पर ही चलकर स्वस्थ समाज और महान साहित्य का सृजन करते हैं। राज्यपाल ने कथाकार सम्राट मुंशी प्रेमचन्द को उद्धृृत करते हुए कहा कि वही साहित्य चिरंजीवी होता है, जिसमें उच्च चिन्तन हो, स्वाधीनता का भाव हो, जीवन की सच्चाइयों का प्रकाश हो- जो हममें गति और बेचैनी पैदा करे, सुलाये नहीं।
राज्यपाल ने कहा कि साहित्य राजनीति का भी मार्ग-दर्शक है। मलिक ने महान फ्रांसिसी लेखक एवं दार्शनिक ज्याॅ पाॅल सात्र्र का उल्लेख करते हुए कहा कि क्रांतिकारी लेखन एवं पत्रकारिता के बावजूद, उन्हें तत्कालीन शासक द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया, चूँकि वे फ्रांस की आम जनता की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

राज्यपाल ने गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा को ‘उदयराज सिंह स्मृति सम्मान’ प्रदान किये जाने पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि राज्यपाल के गुरूतर और व्यस्त दायित्वों के कुशल निर्वहन के साथ-साथ ये प्रचुर संख्या में कहानियाँ, उपन्यास एवं लोक साहित्य पर समीक्षात्मक निबन्ध लिख रही हैं। राज्यपाल ने सिन्हा एवं सम्मान-प्राप्तकत्र्ता अन्य तीन साहित्कारों -सर्वश्री सुरेश अनियाल, बी॰आर॰ विप्लवी और गौरहरि दास को भी अपनी शुभकामनाएँ दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोवा की महामहिम राज्यपाल मृृदुला सिन्हा ने कहा कि लोक संस्कृति, लोक कथाओं एवं लोकपर्वों के बारे में छात्रों को पाठ्यक्रमों में भी पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने ‘लोक साहित्य और नारी’ विषय पर अपना विस्तृृत व्याख्यान प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में सुरेश उनियाल, बी॰आर॰ विप्लवी, गौरहरि दास आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए। स्वागत भाषण ‘नई धारा’ के प्रधान संपादक प्रमथराज सिन्हा ने किया, धन्यवाद ज्ञापन कथाकार बलराम ने किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन सम्पादक शिव नारायण ने किया।