अब भगवान बुद्ध से जुड़ी घोषीकुंडी पहाड़ी होगी संरक्षित

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लखीसराय: भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेषों को गर्भ में छुपाए घोषीकुंडी पहाड़ी संरक्षित की जाएगी। पहाड़ी का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआई) की टीम ने सोमवार को निरीक्षण किया और अधिकारी यहां से स्तूपनुमा दिख रहे ढांचा की ईंट व कुछ अन्य अवशेष अपने साथ ले गए। एएसआई के निर्देश पर नालंदा संग्रहालय के पुरातत्व उपाधीक्षक एमके सक्सेना ने घोषीकुंडी पहाड़ी और आसपास की बस्ती का भी निरीक्षण किया और बौद्ध संस्कृति से जुड़ाव के पुख्ता प्रमाण पाए।

एएसआई की ओर से पहाड़ पर मौजूद सुरंग के भीतर जाने की संभावना टीम द्वारा आंकी गई है। स्तूपनुमा अवशेष के ईंट वहां नीचे बसी बस्तियों के घरों की दीवारों में लगे पाए गए। निरीक्षण के दौरान उनके साथ लखीसराय जिला धरोहर बचाओ समिति के संयोजक विनोद कुमार भी शामिल रहे। इनका दावा है कि वहां केवल बौद्धिज्म होने के प्रमाण हैं।

अवलोकितेश्वर की बताई गई मूर्ति

घोषीकुंडी स्थित कबीर मठ में मौजूद मूर्ति अवलोकितेश्वर की बताई गई। पुरातत्वविद बताते हैं कि भगवान बुद्ध के बाद मैत्रेय का अवतरण होना है। इस बीच के काल के स्वामी को अवलोकितेश्वर बताया जाता है, जोकि कमल की मूर्ति पर विराजमान होते हैं। बायां पैर, दाहिने जांघ के नीचे होता है।

कनिंघम ने की थी खुदाई, मिले थे प्रमाण

डीआर पाटिल लिखित एक्वेरियन रिमेंस ऑफ बिहार पुस्तक, सेज पब्लिकेशंस से प्रकाशित इंडियन हिस्टॉरिकल रिव्यू में शोधपत्र- क्रिमिला: ए फॉरगॉटेन अधिष्ठाना ऑफ अर्ली मिडिएवल इस्टर्न इंडिया व अन्य साहित्यों के अनुसार सन 1860-61 में देश में फादर ऑफ आर्कियोलॉजी माने जाने वाले एलेक्जेंडर कनिंघम ने यहां खुदाई कराई थी, जिसमें उसे कई प्रमाण मिले थे।

घोषीकुंडी पहाड़ी के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

राजगीर के बाद केवल यहीं भगवान बुद्ध ने बिताए तीन वर्षावास

क्रिमिला नदी के पास पहाड़ पर 13वां, 18वां व 19वां वर्षावास

एलेक्जेंडर कनिंघम ने 1860-61 में करवाई थी खुदाई

कीमती पत्थर के बॉक्से में बुद्ध के शरीर का राख मिला था

लाह के 2700 सिक्के और 300 से ज्यादा मुहर मिल चुके हैं

बौद्ध के तीन मुख्य ग्रंथों में से एक अभिधम्मपिटक यहीं लिखे जाने का दावा

स्रोत:एक्वेरियन रिमेंस ऑफ बिहार (पुस्तक-पृष्ठ संख्या 209),लेखक- डीआर पाटिल व अन्य साहित्य

 

#निलेश कुमार(हिन्दुस्तान)