अमिताभ कांत को न तो इतिहास का बोध है और ना ही हिंदी हृदयप्रदेश द्वारा झेली गई समस्याओं की समझ – डॉ. शैबाल गुप्ता

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पटना – आद्री के सदस्य सचिव डॉ. शैबाल गुप्ता ने कहा कि बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य भारतीय राज्यों के बारे में अमिताभ कांत का वक्तव्य अत्यंत निंदनीय एवं दुखद है और यह हमारी राष्ट्रीय एकता के हित में नहीं है। मुझे व्यक्तिगत तौर पर आश्चर्य हुआ कि नीति आयोग जैसी संस्था के शीर्ष पद पर बैठा व्यक्ति, जिससे देश के सामाजिक-आर्थिक असमानता को समाप्त करने की आशा की जाती है, ऐसा वक्तव्य दे रहा है।

उन्होंने कहा कि अमिताभ कांत को न तो इतिहास का बोध है और ना ही हिंदी हृदयप्रदेश द्वारा झेली गई समस्याओं की समझ। हिंदी हृदयप्रदेश, खास कर उत्तर प्रदेश और बिहार का आजादी की पहली लड़ाई में गौरवपूर्ण योगदान रहा है जिसे हम सिपाही विद्रोह के रूप में भी याद करते हैं।

उन्होंने कहा कि जब पूरा राज्य बाबू वीर कुंवर सिंह के विजय दिवस की 160वीं जयंती मना रहा है, तो इस प्रकार का वक्तव्य बिहार का अपमान ही नहीं है, पूरे हिंदी हृदयप्रदेश के राष्ट्रीय विकास और अनेक राज्यों के आर्थिक मजबूती के लिए किए गए योगदानों को अनदेखा करना जैसा भी है। हमें यह समझना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलनों को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश को अंग्रेजों द्वारा अन्य राज्यों की तुलना में अधिक प्रतिकूल बर्ताव झेलना पड़ा था, जिसका असर आजादी के बाद की राष्ट्रीय नीतियों में भी दिखा।

आगे वो कहते हैं कि प्रधनमंत्राी से हमारा आग्रह होगा कि उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए और उनकी ऐसी उक्तियों को रोका जाना चाहिए। यह बात कहीं से भी उचित नहीं है कि एक ऐसे समय में जहां राष्ट्र को अत्यधिक समानुभूति और अखंडता की भावना की जरूरत है, उसी समय सरकार के अति महत्वपूर्ण पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह के विभाजनकारी और भेदभाव की मंशा वाले वक्तव्य दे रहा है।