आकांक्षा अनाथाश्रम पर प्रशासनिक कार्यवाई के विरुद्ध संचालक दंपति ने किया अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

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सहरसा- तत्कालीन आकांक्षा अनाथाश्रम पर प्रशासनिक कार्यवाई के विरुद्ध संचालक दंपति का अपने 7 वर्षीय पुत्र के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज चौथे दिन भी जारी। अपने सगे पुत्री के अलावे अनाथाश्रम में रह रहे सभी बच्चों के अलावे , प्रशासन द्वारा जब्त किये गये आश्रम के समान की वापसी एवं झूठा जांच रिपोर्ट के आधार कार्यवाई करने वाले दोषी पदाधिकारियों पर कार्यवाई के अलावे पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से करवाने आदि की मांगों को लेकर गत 18 जून से जारी अनशन आज चौथे दिन भी जारी रहा।इन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल पर आरोप लगाते हुये कहा कि इन्होंने झूठे जांच रिपोर्ट पर बिना सच्चाई जाने कार्यवाई करते हुये मेरे अपने बच्चे सहित अनाथाश्रम के सारे बच्चों को जबरन अन्य शहरों में विस्थापित कर दिये साथ ही झूठा मुकदमा कर मुझ दंपति को भी जेल भेज दिया।

इस बावत अनाथाश्रम संचालक शिवेंद्र कुमार की माने  तो 2008 के कुसहा त्रासदी के शिकार बच्चे इस अनाथाश्रम में पल बढ़ रहे थे बिना सरकारी सुविधा के जनसहयोग से चल रहे आश्रम में अचानक पदाधिकारी को क्या हुआ कि फर्जी जांच रिपोर्ट एवं फर्जी धारा लगाकर जेल भेज दिया और इधर मेरे अपने बेटे बेटी सहित सबको उठाकर ले गया। वहीं मेरे बेटे को गोद लेने के लिये विज्ञापन भी निकल दिया। बेटी से नौ महीने से बात नहीं हो रहा है। वो किस स्थिति में है जिन्दा है या मर गया मुझे कुछ नहीं है पता।

मैं भूख हड़ताल कर न्याय की गुहार लगा रहा हूँ। वहीं यहां के अधिकारी उनकी मांगों को जायज मानते हुये भी न्याय देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं इनकी पत्नी बबली देवी अपने बच्ची से मिलने के लिये तड़प रही है इन्होंने कहा कि सहरसा से पटना एवं पटना से सहरसा दौडते-दौड़ते थक चुके है मुझे मार दीजिये पर मुझे बेटी से मिलवा दीजिये, इसका रोते-रोते बुरा हाल है। सच मायने में देखा जाय तो अपने बच्चों से मिलने की आस में इन दंपतियों को अनशन के लिये बाध्य किया है। जरूरत है इनकी मांगों पर विचार करते हुये समुचित न्याय प्रदान करने की जिससे पीड़ितों का विश्वास प्रशासन पर बना रहे।