आखिर कब जागेंगे प्रशासन..

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कटिहार: बिहार के कटिहार में एनआईटी नाव हादसे की तरह कभी भी दोहराया जा सकता हैं। कटिहार में बड़ा कश्ती हादसा हो सकता है। लोग जान जोखिम में डाल भेड़ बक़डियों की तरह नाव में सफर करते हैं। सफर के दौरान नहीं होता हैं कोई लाइफ जैकेट और बाइकों से खचाखच भरी होती हैं नावें जिससे गंगा की लहरों के बीच नावों के पहुंचते ही यात्री हो जाते हैं भगवान भरोसे। और स्थानीय प्रशासन को नावों पर ना कोई ओवरलोडिंग दिखती हैं और ना ही बाइकों का जखीरा।

कटिहार जिले के मनिहारी घाट में जहां से रोजाना सैकड़ों नावें बिहार और झारखण्ड के बीच गंगा नदी पर चलती है। बिहार के मनिहारी और झारखण्ड के साहेबगंज के बीच चलने वाली इन कश्तियों पर लोग गाजर – मूली की तरह बेतरतीब खचाखच बाइकें नावों पर लदी रहती है।

बिहार के मनिहारी और झारखण्ड के बीच नावों के अलावा इकलौता स्टीमर फेरी सेवा भी हैं लेकिन यह भी मौत की सवारी करने जैसा हैं। यह दृश्य बताने के लिये काफी हैं कि बिहार में प्रशासनिक तन्त्र किस तरह बेपरवाह हैं और किसी हादसे के बाद जाँच के आदेश देकर कोरम पूरा करते।