आरण्य देवी मंदिर : कभी भगवान राम भी आए थे यहां

1367
0
SHARE

पटना: बिहार की राजधानी पटना से आरा के शीश महल चौक से उत्तर-पूर्व छोर पर आरण्य देवी मंदिर स्थित है। इस मंदिर की स्थापना 2005 में किया गया है। इस एतिहासिक मंदिर के कई धारणाएं और मान्यताएं है। कहा जाता है कि पांडव वनवास के क्रम में आरा में ठहरे थे। पांडवों ने आदिशक्ति की पूजा-अर्चना की। मां ने युधिष्ठिर को स्वपन् में संकेत दिया कि वह आरण्य देवी की प्रतिमा स्थापित करे। धर्मराज युधिष्ठिर ने मां आरण्य देवी की प्रतिमा स्थापित की।

बताया जाता है कि द्वापर युग में इस स्थान पर राजा मयूरध्वज राज करते थे। इनके शासनकाल में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के साथ यहां आये थे। श्रीकृष्ण ने राजा के दान की परीक्षा लेते हुए अपने सिंह के भोजन के लिए राजा से उसके पुत्र के दाहिने अंग का मांस मांगा।

आरण्य देवी की मूर्तियां काले पत्थर की हैं। एक मूर्ति 4½ फुट ऊंची है और दूसरी 3½ फुट ऊंची है। यह कहा जाता है कि दोनों बहनें हैं। वे पीले रंग की साड़ी में उनके सिर पर फूल माला और मुकुट के साथ सज रही हैं। आरण्य देवी की दाहिने तरफ के मंदिर में राधा और कृष्ण की मूर्तियां हैं ।

इस मंदिर में स्थापित बड़ी प्रतिमा को जहां सरस्वती का रूप माना जाता है, वहीं छोटी प्रतिमा को महालक्ष्मी का रूप माना जाता है। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में वर्ष 1953 में श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, भरत, शत्रुधन् व हनुमान जी के अलावे अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित की गयी थी।

इस ऐतिहासिक आरण्य देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए जुटते है।