आर्दा में पेड़ लगाने से शांत होते हैं ग्रह

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आर्द्रा नक्षत्र की शुरुआत हो गई है। कृषि कार्यो के लिए खास दस नक्षत्रों में आद्रा सबसे प्रमुख माना जाता है। सनातन धर्मावलंबियों में इस नक्षत्र को बरसात की शुरुआत माना जाता है। हालांकि आद्रा में ज्योतिषियों ने खंडवृष्टि की भी संभावना जतायी है।
सूर्य के आर्द्रा में होने से बारिश और नमी ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्य के आकाशमंडल के 27 नक्षत्रों में छ्ठे नक्षत्र आर्द्रा में प्रवेश होने से सामान्यतः वर्षा और वातावरण में नमी आती है। आर्द्रा संस्कृ्त है जबकि हिन्दी में इसका मतलब नमी होता है। यह नक्षत्र मृगशिरा और पुनर्बसु नक्षत्र के बीच में आता है।

पीपल,पाकड़ का पेड़ लगाने से ग्रहों की शांति: आचार्य ने शिवपुराण और वृहत संहिता के हवाले से बताया कि आद्रा में पीपल और पाकड़ के पेड़ लगाने और पुजन से राहु, शनि और कालसर्प के दुष्प्रभावों से शांति होती है। आद्रा नक्षत्र में जन्मे जातक के ग्रहों की शांति की पूजा पीपल और पाकड़ के पेड़ की छाया में करने से दोष खत्म होते हैं। उनके अनुसार आर्द्रा नक्षत्र में के स्वामी राहू हैं जबकि देवता शिव । मान्यता है कि पाकड़ और पीपल के पेड़ में भगवान का वास होता है।

ज्योतिषाचार्य मर्कण्डेय शारदेय के अनुसार इस वर्ष और पिछले वर्ष और पिछले वर्ष भी 22 जून को ही सूर्य का प्रवेश आर्द्रा नक्षत्र में हुआ था। पिछले साल बुधवार था और पर इस बार बृस्पतिवार्। इस बार बृस्पति ही वर्षा के स्वामी अर्थात मेघेश होंगे। आचार्य के अनुसार आद्रा का प्रवेश गुरुवार 22 जून हुई है और समापन 6 जुलाई की रात को होगी।