इस जलकुंड में हमेशा निकलता है गर्म पानी

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प्राकृतिक सौंदर्य के बीच गर्म जल के लिए प्रसिद्ध है ऋषिकुंड। पहाड़ की तराई से साल भर निकलने वाले गर्म जल से न सिर्फ लोग स्नान करते हैं, बल्कि इसका सेवन कर खुद को स्वस्थ भी रखते हैं।

मुंगेर के ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है ये ऋषिकुंड। जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर खड़गपुर प्रखंड में स्थित ऋषिकुंड गर्मजल के लिए प्रसिद्ध है। यहां आने के लिए लोग निजी वाहन का उपयोग करते हैं। पहाड़ की तराई से निकलने वाले गर्म जल से न सिर्फ लोग स्नान करते हैं, बल्कि खुद को स्वस्थ रखने के लिए भी गर्म जल का सेवन करते हैं। भू-गर्भ में गंधक की मात्रा अधिक होने के कारण 24 घंटे गर्मजल की धारा प्रवाहित होती है। जहां से जल प्रवाहित हो रही है उसके पास ही एक तालाब है, जिसे ऋषिकुंड कहा जाता है।

जनश्रुति है कि ऋषि विभांडक का यहां आश्रम था। ऋषि यहां शिक्षा दान भी किया करते थे। ऋषि विभांडक के आश्रम के कारण ही यह जगह ऋषिकुंड के नाम से विख्यात हुआ। गर्म जल में स्नान करने व उसके सेवन से पेट रोग, चर्म रोग आदि से लोगों को मुक्ति मिलती है। यह स्थान काफी रमणीक है।

प्रत्येक तीन वर्ष में यहां मलमास मेला भी लगता है, प्राकृतिक सौंदर्य एवं गर्म जल की दृष्टि से हजारों की संख्या में लोग इस कुंड में डुबकी लगाने को पहुंचते हैं। हालांकि सरकारी उपेक्षा के कारण इस जगह को अन्य पर्यटक स्थलों की तरह महत्व नहीं मिला। कुंड की साफ-सफाई भी स्थानीय स्वयंसेवकों पर ही निर्भर है।

यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित भी है। 2006 में एक जनवरी को पिकनिक के दौरान नक्सली हमले में चार सैप के जवान मारे गये थे। इस घटना के बाद यहां लोग कम आने लगे लेकिन धीरे-धीरे अब लोग गर्म जल के कुंड में स्नान करने के लिए आने लगे हैं। खासकर बड़ा दिन, एक जनवरी एवं मलमास मेला में यहां काफी भीड़ लगती है। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर न तो यहां सुरक्षा का इंतेजाम है और न ही आने वाले लोगों की सुविधा के लिए कोई प्रबंध किया जाता है।

#कुमार आदित्य (हिन्दुस्तान)