उपेन्द्र कुशवाहा के नाटक का पात्र बने तेजस्वी – संजय सिंह

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संजय ने चुटकी लेते हुए कहा… तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो …क्या गम है जिसको छिपा रहे हो…….

तेजस्वी यादव जी, इस कातिल हंसी के पीछे का राज क्या है ? आप महागठबंधन के नेता है और नेता उपेंद्र कुशवाहा बनना चाहते है । ऐसे में ये हंसी कही ये तो नही बता रही है कि चलो इनका अनशन खत्म करके इनकी राजनीति को समाप्त कर दिया आपने ।

तेजस्वी जी , जितने भी नेता उपेंद्र कुशवाहा के अनशन को तुड़वाने पहुचे थे ना , उन सबकी राजनीति मर चुकी है । सब अपनी राजनीति को जिंदा रखने के लिए संघर्ष कर रहे है । आप तो कुछ ज्यादा ही संघर्ष कर रहे क्योंकि आपको लालू विरासत के साथ साथ अपने आपको भी बचाना है ।

तेजस्वी यादव जी , उपेंद्र कुशवाहा के नाटक के हिस्सा आप भी बन गए, इसके लिए आपको बधाई । उपेंद्र कुशवाहा ये जो अनशन का नाटक कर रहे है ये स्वार्थ का अनशन है । हाशिये पर जा चुकी राजनीति को वो ऑक्सीजन देना चाहते है ।

उपेंद्र कुशवाहा जब देश के शिक्षा मंत्री थे तब बिहार के लिए क्या किया | साढ़े चार साल तक केंद्र में मंत्री रहे लेकिन बिहार के तरफ देखा नहीं । आज तेजस्वी यादव के साथ गलबहिया मिला रहे है वो चार्टशिटेड है । जिनके साथ आप बैठे उन्होंने बिहार में चरवाहा विद्यालय खोला , लोगो को पढ़ाने नहीं दिया । आज श्री नीतीश कुमार जी ने  गाँव गाँव में कॉलेज -स्कुल, पोलटेक्टनिक , मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज  , फैशन कॉलेज , कानून विश्वविद्यालय, ज्ञान विश्वविद्यालय सहित कई शिक्षण संस्थाए खोली है ।

उपेंद्र कुशवाहा जी, ऐसी क्या मजबूरी रही कि आपने लालू यादव के चरवाहा मॉडल को स्वीकार कर लिया। बढ़िया तो यह होगा कि आप 1990 और 2005 का तुलनात्मक डाटा लेकर बिहार की जनता के बीच जाइए। जनता आपको खुद बता देगी की उसे बिहार में कौन सा मॉडल पसंद है।

उपेंद्र कुशवाहा जी, आपका फैसला जनहित को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि अपनी राजनीति को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय है। आप एक अवसरवादी की तरह साढ़े चार साल तक सत्ता में रहे और आज बाहर होते ही विधवा विलाप कर रहे हैं। जनता आपकी नाटकबाजी को बखूबी समझ रही है।

कुशवाहा जी, आज आप केंद्र की राजग सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर कोस रहे हैं लेकिन अगर ऐसा है तो यह केंद्रीय मंत्री के तौर पर यह आपकी विफलता है। इसका मतलब तो यह हुआ कि शिक्षा विभाग का कामकाज करते हुए आपने अपना दायित्व पूरा नहीं किया।

उपेंद्र कुशवाहा जी, आप जब मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नहीं हुए तो किसके होंगे?  नीतीश जी ने आपको राजनीति में सबसे ज्यादा अवसर दिए। पहले बिहार में नेता विरोधी दल की भूमिका फिर बाद में राज्यसभा भेजकर संसद की सीढियां चढ़ने का अवसर दिया। लेकिन आपने बदले में नीतीश कुमार जी के पीठ पर छुरा मारने का काम किया।