उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा, मेरे चेहरे की हंसी देख कर अंदाजा नहीं लगा सकते हैं, उपेन्द्र कुशवाहा कभी किसी के किए समस्या नहीं है

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पटना – राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के मुखिया उपेन्द्र कुशवाहा ने प्रेस वार्ता में कहा कि पार्टी का हल्ला बोल दरवाजा खोल का कार्यक्रम बिहार भर में चल रहा है। कुछ जिला को छोड़ प्रायः हर जिला में चला, दिल्ली में भी एवं अन्य राज्य में भी चला। लोगों को जागृत करना लोगों को कार्यक्रम से अवगत कराना पार्टी कार्यकर्ता के लिए था।

उन्होंने कहा कि अब पब्लिक के बीच में जाने का कार्यक्रम बन रहा है। पहले 28 अक्टूबर को मुज़फ्फरपुर जाएंगे, 3 नम्बर को गया, 24 नवम्बर को मुंगेर, 25 नम्बर को पूर्णिया जायेंगे। इस कार्यक्रम का नाम होगा हल्ला बोल दरवाजा खोल। ये चार जगह से कार्यक्रम महासम्मेलन होगा। समाज के दबे कुचले, दलित लोगों, गरीब लोगों के लिए शिक्षा का इंतजाम नहीं के बराबर है, शिक्षालय के दरवाजे को खोलने की जरूरत है। उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय में इनलोगों की पहुंच जरूरी है, ऊँची जाति के परिवार के लोग जो गरीब हैं उनके लिए भी दरवाजा उच्च न्यायालय में बंद है। एससी/एसटी, ओबीसी, महिलाएं, गरीब, ब्राह्माण, सवर्ण नौजवान उनके पास चाहे जितनी भी मेरिट क्यों न हो, उनके लिए दरवाजा बंद है। लोगों का भरोसा न्यायपालिका पर बढ़े। वंचितों के लिए दरवाजा खोलने के लिए हल्लाबोल कार्यक्रम करेंगे। इसमें सभी समाज के लोगों का समर्थन मिले। शिक्षा के दरवाजे के साथ न्यायालय के भी दरवाजा खुले इसलिए लोगों का सहयोग जरूरी है। कुछ लोगों को लगता है कि हमको न्यायालय में न्याय नहीं मिल रहा है। इसलिए इस समाज के लोगों को भी प्रतिनिधि मिले। सभी जातियों से अपील है कि शिक्षा के दरवाजे के साथ न्यायालय के भी दरवाजा खुले इसमें आपलोगों का सहयोग जरूरी है।

अपने पैगाम-ए-खीर कार्यक्रम पर उन्होंने कहा कि समाज में फैले तनाव से मुक्ति के लिए सभी समाज एक साथ बैठकर खीर बनाएंगे। कहीं से दूध, कहीं से चावल, कहीं से तुलसी, कहीं से दस्तरखान सब मिल कर समाज को एक जुट किया जाएगा।

सीट शेयरिंग के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मीडिया के लोग कभी कहते हैं यह हुआ, फिर कहते हैं कि यह नहीं हुआ। फिर इसी बात का खंडन करते हैं। समय आने पर आपलोगों को बताएंगे कि किससे कब बात हुई क्या हुई समय पर बोलेंगे। पार्टी उपाध्यक्ष नागमणि से आपलोग कब क्या बुलवा लेते हैं। जनता से रोज बात हो रही ही समय पर न्योता देकर आपलोगों को बुलाकर बताएंगे। मेरे चेहरे की हँसी देख कर अंदाजा नहीं लग रहा है कि क्या माहौल है। मुजफ्फरपुर की घटना पर कहा कि जब मैंने इस घटना के बारे में सुना तो मेरे मुंह से निकला कि ‘हे भगवान, क्या हो रहा है।’