एक परंपरा ऐसा भी!

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गया – एक ऐसी भी आस्था कहे या अंधविश्वास भगवान इंद्र को खुश करने और अच्छी बारिश होने के लिए ग्रामीणों ने की बेंग कुटनी। भयंकर सूखे की सम्भावनाओं की चपेट में बिहार के गया जिले में अब अंधविश्वासों का लिया जा रहा है सहारा। दर्जनों महिलाओं द्वारा मेढ़क को पकड़कर डंडे से पीट-पीटकर मार डालने की है प्राचीन परंपरा। बारिश होने के लिए कभी नहीं देखी होगी ऐसी अनोखी परम्परा।

गया मोक्ष और ज्ञान की नगरी के रूप में विश्वविख्यात है लेकिन यहाँ आज भी कई ऐसे गांव है जहां अंधविश्वास का मकड़जाल कुछ इस तरह फैला है। जिले के बोधगया प्रखंड के जैतिया गांव में दर्जनो महिलाओं ने पुराने वटवृक्ष के नीचे मेढ़क को पकड़कर रखा। महिलाएं घण्टो इंद्र भगवान को खुश करने के लिए देवी गीत गाती हैं। इस दौरान मेढ़क को आपस में धागा से बाँध दिया जाता है। फिर सभी महिलाएं उठ कर डंडे से मेढ़क को कुचल-कुचल कर मार डालती है। इस दौरान भी गीत का दौर चलता रहता है।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि यह काफी प्राचीन परंपरा है। उनके पूर्वज भी यही करते आये हैं। बताया कि पहले मेढ़क की शादी, महिलाओं का नग्न होकर खेतों में हल चलाना आदि जैसे कई टोटके हैं जिससे बारिश की सम्भावनाएं बढ़ जाती है।

ग्रामीणों ने बताया कि आज गांव में बेंग कुटनी किया गया ताकि भगवान इंद्र खुश हो और अच्छी बारिश हो। बताया कि खेतों में पानी-पानी के लिए मोहताज है। यही रहा तो भूखे मर जायेंगे। इस तरह के टोटके कई बार सही साबित हुई है और फिर अच्छी बारिश हुई है। यह प्राचीन परंपरा है जिसे करते आ रहे है।