एग्रो बिहार मेला पूर्वी भारत का सबसे बड़ा यांत्रिकरण मेला है : डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना – बिहार के कृषि विभाग मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि गाँधी मैदान, पटना में आयोजित एग्रो बिहार, 2019 राज्यस्तरीय कृषि यंत्र प्रदर्शनी-सह-किसान मेला का आज दूसरा दिन है। इसमें बड़ी मात्रा में राज्य के किसान भाई-बहन भाग ले रहें हैं। इस मेला में किसानों को कृषि यंत्रों का प्रदर्षन, उनके बारे में तकनीकी जानकारी तथा उन्हें कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ एक ही साथ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि यह मेला पूर्वी भारत का सबसे बड़ा यांत्रिकरण मेला है। यह मेला 09-12 फरवरी तक कृषि विभाग, बिहार द्वारा आई॰सी॰सी॰ के सहयोग से गाँधी मैदान, पटना में आयोजन किया जा रहा है। राज्य में इसका आयोजन वर्ष 2011 से लगातार किया जाता रहा है।

इस मेले में पटना, जहानाबाद, मधेपुरा, नवादा, रोहतास, मुजफ्फरपुर, शिवहर, मधुबनी, प॰ चम्पारण एवं दरभंगा जिले के किसानों ने भाग लिया। दो दिनों में इस मेला में राज्य के किसानों के बीच अब तक 23 कम्बाईन हार्वेस्टर, 37 रीपर-कम-बाईन्डर, 48 जीरोटिलेज, 5 पावर टीलर, 199 रोटावेटर, 71 थ्रेसर, 7 एम.बी. प्लाऊ, 16 स्ट्रा रीपर/स्ट्रा कम्बाईन, 90 चैफकटर, 8 मिनी रबर राईस मिल, 10 कल्टीवेटर, 186 पम्पसेट, 14 विद्युत मोेटर, 23 पावर स्प्रेयर, 13 डिस्क हैरो, 5 रीजर/ट्रेंचर आदि कृषि यंत्रों के क्रय पर 3,87,13,500 रूपये अनुदान के रूप में वितरित किये गये, जिसमें आज 2,17,36,500 रूपये अनुदान दिये गये।

आज तक इस प्रदर्शनी-सह-मेला में राज्य के 15 हजार से अधिक किसान/आगन्तुक आये, जिनमें आत्मा योजना के माध्यम से सरकारी खर्चे पर आज इस मेला में 10 जिले यथा-पटना के 250, जहानाबाद के 127, मधेपुरा के 223, नवादा के 239, रोहतास के 329, मुजफ्फरपुर के 281, शिवहर के 95, मधुबनी के 361, प॰ चम्पारण के 305 एवं दरभंगा के 302 यानि कुल 2,521 किसानों को भ्रमण पर लाया गया। इस मेले में किसी तरह का प्रवेष शुल्क नहीं है। कोई भी किसान/व्यक्ति स्वेच्छा से इस प्रदर्शनी/मेला में भाग ले सकते हैं। इस मेला-सह-प्रदर्शनी में विभिन्न कृषि यंत्र निर्माताओं द्वारा अपने कृषि यंत्र का प्रदर्शन किया जा रहा है। कृषक अपनी पसंद एवं इच्छा से इन कृषि यंत्रों का क्रय सरकार द्वारा अनुदानित दर पर कर रहे हैं।

मेला परिसर में संचालित किसान पाठशाला में प्रतिभागी किसानों को डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के वैज्ञानिक द्वारा फसलों की बोआई के उपरान्त कटाई, दौनी एवं उसके प्रसंस्करण से संबंधित कृषि यंत्रों की जानकारी, उपयोगिता एवं उनके प्रयोग विधि के बारे में विस्तार से बताया गया। किसान पाठशाला में जय प्रकाश नारायण, संयुक्त निदेशक (कृषि अभियंत्रण), बिहार द्वारा कृषि यांत्रिकरण में ऑनलाईन आवेदन की प्रक्रिया एवं अनुदान भुगतान संबंधी साॅफ्टवेयर के बारे में किसानों को बताया गया। साथ ही, उनके द्वारा किसानों को कृषि यांत्रिकरण योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर देय अनुदान के बारे में जानकारी दी गई। संयुक्त निदेशक, पौधा संरक्षण डाॅ॰ प्रमोद कुमार ने किसानों को फसलों के प्रमुख रोग एवं उनका एकीकृत प्रबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

उद्यान निदेशालय के पदाधिकारियों द्वारा किसानों को संरक्षित खेती के माध्यम से गुणवत्तायुक्त उद्यानिक फसलों का उत्पादन एवं उद्यान से संबंधित योजनाओं के बारे में बताया। इस एग्रो बिहार-2019 में खेत की जुताई से लेकर फसल कटाई एवं प्रसंस्करण तक तमाम मशीने यथा कम्बाईन हार्वेस्टर, पैडी ट्रांसप्लांटर, हैप्पी सीडर, राइस मिल, स्ट्रा रीपर, रीपर कम बाइन्डर, रेज्ड वेड प्लांटर, पोटैटो डिगर, पोटैटो प्लांटर, पम्प सेट, ट्रैक्टर, पावर टीलर, स्वचालित रीपर, स्ट्रा वेलर, धान/गेहूं थ्रेसर एवं अन्य उपयोगी मशीन किसानों के बीच प्रदर्शित किये जा रहे हैं। संध्या में मुख्य मंच पर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार के माध्यम से छपरा के निश्चय, मुम्बई के आलोक कुमार पाण्डेय, सासाराम के सुरेन्द्र राम एवं पटना के परमजीत कुमार द्वारा प्रस्तुत लोकगीत में दर्शकों का खूब मनोरंजन किया किया गया।

एग्रो बिहार, 2019 का मुख्य आकर्षण

लगभग 3 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में इस मेला में 100 से अधिक स्टाॅल लगाये गए हैं। इस प्रदर्शनी में बिहार के अलावे दिल्ली, हरियाणा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के कृषि यंत्र निर्माता आधुनिक कृषि यंत्रों के साथ भाग ले रहे हैं। प्रत्येक दिन किसान पाठशाला में किसानों को बुआई से कटाई तक के नवीनतम कृषि यंत्र, शक्ति चालित कृषि यंत्र, छोटे-छोटे कृषि यंत्र, संसाधन संरक्षण तकनीक में कृषि यंत्रों की उपयोगिता, कृषि उत्पाद प्रसंस्करण एवं वैल्यू एडिशन से संबंधित कृषि यंत्र, सूक्ष्म एवं ड्रिप सिंचाई यंत्र, खरपतवार नियंत्रक व निकाई-गुराई संबंधित यंत्र तथा कृषि यंत्रों की कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए कल-पूर्जों के रख-रखाव एवं अन्य संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दिया जायेगा।

राज्य के विभिन्न जिलों से प्रतिदिन 2500 किसानों को आत्मा के माध्यम से सरकारी खर्चे पर मेला में लाने की व्यवस्था की गई है। इस मेला में भारत सरकार, राज्य सरकार के वरीय पदाधिकारीगण एवं वरीय वैज्ञानिकगण भी भाग ले रहे हैं। आधुनिक कृषि यंत्रों के अतिरिक्त स्थानीय कृषि उत्पाद के प्रसंस्करण/भैल्यू एडीसन कर रोजगार का अवसर प्रदान करने वाले छोटे-मंझोले यंत्र भी इस मेला में प्रदर्शित किये गये हैं।

राज्य के सभी जिलों में उन्नत कृषि यंत्रों के विक्रेता उपलब्ध नहीं होने के कारण कृषकों को यंत्र क्रय करने में कठिनाई होती है। इस समस्या को दूर करने के उद्देश्य से इस मेला में कृषि यंत्रों के निर्माताओं एवं बिक्रेताओं की व्यावसायिक बैठक (बी॰ टू बी॰ मीट) का आयोजन भी किया गया है। यंत्र निर्माताओं/विक्रेताओं की समस्या और उसके निराकरण हेतु बिजनेस-टू-गवर्नमेन्ट (बी॰ टू जी॰ मीट) का भी आयोजन किया जा रहा है। इस मेला में पहली बार रूफ टाॅप गार्डेनिंगए पशुपालन, मत्स्यपालन, मधुमक्खीपालन, उद्यान, भूमि संरक्षण, बीज, खाद, कीटनाशक दवा आदि से संबंधित प्रदर्शनी एवं स्टाॅल लगाये गए हैं।

स्थानीय बच्चों एवं कृषि महाविद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के बीच कृषि के प्रति आकर्षण बढ़ाने के उद्देश्य से मेला भ्रमण करने एवं क्वीज प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु उन्हें आमंत्रित किया गया है। मेला परिसर में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा प्रतिदिन कृषकों/आगंतुकों के मनोरंजन के लिए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन संध्या में प्रत्येक दिन किया जायेगा। इस प्रदर्शनी में आगंतुकों के लिए बिहारी व्यंजनों का फूड कोर्ट की व्यवस्था भी की गई है।