एग्रो बिहार कृषि मेला में किसानों को कृषि यंत्रों के बारे में तकनीकी जानकारी तथा कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ मिल रहा एक ही साथ -डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना- कृषि मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि गाँधी मैदान, पटना में आयोजित एग्रो बिहार, 2018 राज्यस्तरीय कृषि यांत्रिकरण प्रदर्शनी-सह-मेला में बड़ी मात्रा में राज्य के किसान भाई-बहन भाग ले रहें है। इस मेला में किसानों को कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, उनके बारे में तकनीकी जानकारी तथा उन्हें कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ एक ही साथ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि यह मेला पूर्वी भारत का सबसे बड़ा यांत्रिकरण मेला है। यह मेला दिनांक 22-25 फरवरी, 2018 तक कृषि विभाग, बिहार द्वारा सी॰आई॰आई॰ के सहयोग से गाँधी मैदान, पटना में आयोजन किया जा रहा है। राज्य में इसका आयोजन वर्ष 2011 से लगातार किया जाता रहा है।

आज इस मेला में पटना, जहानाबाद, मधेपुरा, नवादा, रोहतास, मुजफ्फरपुर, शिवहर, मधुबनी, प॰ चम्पारण एवं किशनगंज जिले के किसानों ने भाग लिया। दो दिनों में इस मेला में राज्य के किसानों के बीच 56 कम्बाईन हार्वेस्टर, 60 रीपर-कम-बाईन्डर, 16 पावर टीलर, 246 रोटावेटर, 3 लैंड लेजर लेवलर, 175 थ्रेसर, 59 स्ट्रा/सेल्फ रीपर, 88 चैफकटर, 9 मिनी रबर राईस मिल, 11 कल्टीवेटर, 197 पम्पसेट, 7 डीस्कहैरो, 85 पावर स्प्रेयर, 3 जीरोटिलेज, 20 पावर बिडर आदि कृषि यंत्रों के क्रय पर 6,48,79,500 रूपये अनुदान के रूप में वितरित किये गये, जिसमें आज 5,00,68,500 रूपये अनुदान दिये गये।

इस मेला में एग्रो बिहार सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन समिति की ओर से बिजेन्द्र चौधरी, संयुक्त निदेशक (रसायन), गुण नियंत्रण, संजय कुमार सिंह, उप निदेशक (रसायन), गुण नियंत्रण तथा सुधीर कुमार मिश्रा, उप निदेशक, भूमि संरक्षण, बिहार, पटना द्वारा कृषि विषयों पर आधारित एक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस क्विज प्रतियोगिता में राज्य के 33 जिलों के 92 कृषि समन्वयकों ने भाग लिया। इस क्विज प्रतियोगिता में गया जिला प्रथम, पटना जिला द्वितीय एवं रोहतास जिला तृतीय स्थान पर रहे। पुरस्कार स्वरूप इन्हें मोमेन्टो एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। बेगूसराय एवं पूर्णिया जिला को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

इस चार दिवसीय राज्यस्तरीय कृषि यांत्रिकरण प्रदर्शनी-सह-मेला के दूसरे दिन आज कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय, पूसा के कृषि अभियंत्रण के 35 छात्र एवं 15 छात्राएँ द्वारा इंजीनियर आई॰बी॰ भगत, कनीय वैज्ञानिक तथा इंजीनियर संजय कुमार, कनीय वैज्ञानिक के साथ एग्रो बिहार, 2018 राज्यस्तरीय कृषि यांत्रिकरण मेला-सह-प्रदर्शनी का शैक्षणिक भ्रमण किया गया। उन्होंने कहा कि इतनी सारी कृषि यंत्रों को एक जगह देखकर हमें काफी प्रसन्नता हो रही है। इससे हमें काफी ज्ञानवर्द्धन हुआ है।

आज तक इस प्रदर्शनी-सह-मेला में राज्य के 15 हजार से अधिक किसान/आगन्तुक आये, जिनमें आत्मा योजना के माध्यम से सरकारी खर्चे पर आज इस मेला में 10 जिले यथा-पटना के 200, जहानाबाद के 100, मधेपुरा के 150, नवादा के 150, रोहतास के 150, मुजफ्फरपुर के 200, शिवहर के 50, मधुबनी के 200, प॰ चम्पारण के 180 एवं किशनगंज के 100 यानि कुल 1,480 किसानों को भ्रमण पर लाया गया। इस मेले में किसी तरह का प्रवेष शुल्क नहीं है। कोई भी किसान/व्यक्ति स्वेच्छा से इस प्रदर्शनी/मेला में भाग ले सकते हैं। इस मेला-सह-प्रदर्शनी में विभिन्न कृषि यंत्र निर्माताओं द्वारा अपने कृषि यंत्र का प्रदर्शन किया जा रहा है। कृषक अपनी पसंद एवं इच्छा से इन कृषि यंत्रों का क्रय सरकार द्वारा अनुदानित दर पर कर रहे हैं।

मेला परिसर में संचालित किसान पाठशाला में प्रतिभागी किसानों को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के वैज्ञानिकों द्वारा फसलों की बोआई के उपरान्त कटाई, दौनी एवं उसके प्रसंस्करण से संबंधित कृषि यंत्रों की जानकारी, उपयोगिता एवं उनके प्रयोग विधि के बारे में विस्तार से बताया गया। कृषि यंत्र निर्माता एवं विक्रेताओं द्वारा सी॰आई॰आई॰ के तरफ से किसानों को कृषि क्षेत्र में ट्रेक्टर का महत्त्व, संचालन एवं उसके रख-रखाव की जानकारी किसानों को दी गई। किसान पाठशाला में रविन्द्र कुमार वर्मा, संयुक्त निदेशक (कृषि अभियंत्रण), बिहार द्वारा कृषि यांत्रिकरण में आॅनलाईन आवेदन की प्रक्रिया एवं अनुदान भुगतान संबंधी साॅफ्टवेयर के बारे में किसानों को बताया गया। साथ ही, उनके द्वारा किसानों को कृषि यांत्रिकरण योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर देय अनुदान के बारे में जानकारी दी गई। राज्य के लिए उपयोगी आधुनिकत्तम बड़े कृषि यंत्र यथा- लैंड लेजर लेवलर, रेज बेड प्लांटर, कम्बाईन हार्वेस्टर, पोटैटो प्लांटर आदि की जानकारी, उपयोग एवं इनके रख-रखाव के संबंध में उद्यान महाविद्यालय, नूरसराय, नालन्दा के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को बताया गया।

इस एग्रो बिहार-2018 में खेत की जुताई से लेकर फसल कटाई एवं प्रसंस्करण तक तमाम मशीने यथा- पोर्टेबल कोल्ड स्टोरेज, कम्बाईन हार्वेस्टर, पैडी ट्रांसप्लांटर, हैप्पी सीडर, राइस मिल, स्ट्रा रीपर, रीपर कम बाइन्डर, रेज्ड वेड प्लांटर, पोटैटो डिगर, पोटैटो प्लांटर, पम्प सेट, ट्रैक्टर, पावर टीलर, स्वचालित रीपर, स्ट्रा वेलर, धान/गेहूं थ्रेसर एवं अन्य उपयोगी मशीन किसानों के बीच प्रदर्शित किये जा रहे हैं।
संध्या में मुख्य मंच पर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार के माध्यम से अमर आनंद एवं राजीव रंजन सिंह द्वारा लोकगीत प्रस्तुत किया गया। संगम कला एवं प्रबंधन संस्थान, पटना के कलाकारों ने लोकनृत्य प्रदर्शित किया। शैलेन्द्र कुमार राकेश द्वारा प्रस्तुत बज्जिका गायन दर्शकों का मन मोह लिया।

एग्रो बिहार, 2018 का मुख्य आकर्षण:

लगभग 3 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में लगने वाले इस मेले में 100 से अधिक स्टाॅल लगाये गये हैं। इस प्रदर्शनी में बिहार के अलावे दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, छतीसगढ़, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के कृषि यंत्र निर्माता भाग ले रहे हैं।

इस प्रदर्शनी में मोबाईल कोल्ड स्टोरेज का भी स्टाॅल किसान बंधु देख पायेंगे जो सोलर प्लेट से चलेगा एवं क्षमता 5 टन है। यह ताजे फल, सब्जी, फूल को अधिक समय तक संरक्षित रखेगा जो छोटेे किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। प्रत्येक दिन किसान पाठशाला में किसानों को बुआई से कटाई तक के नवीनतम कृषि यंत्र, शक्ति चालित कृषि यंत्र, छोटे-छोटे कृषि यंत्र, संसाधन संरक्षण तकनीक में कृषि यंत्रों की उपयोगिता, प्रसंस्करण एवं भैल्यू एडिशन से संबंधित कृषि यंत्र, सूक्ष्म एवं ड्रिप सिंचाई यंत्र, खरपतवार नियंत्रक व निकाई-गुराई संबंधित यंत्र तथा कृषि यंत्रों की कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए कल-पूर्जों के रख-रखाव एवं अन्य संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

किसान पाठशाला में राज्य के सभी जिलों से 600 किसानों को प्रतिदिन आत्मा के माध्यम से सरकारी खर्चे पर लाने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही राज्य के सभी जिलों से लगभग 1,000 कृषि यंत्र व्यावसायियों के भाग लेने की संभावना है। कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कृषि मशीनरी परीक्षण केन्द्र (हिसार, बुद्धनी, बीकानेर) के वैज्ञानिकगण भी भाग ले रहे हैं।

राज्य के सभी जिलों में उन्नत कृषि यंत्रों के विक्रेता उपलब्ध नहीं होने के कारण कृषकों को यंत्र क्रय करने में कठिनाई होती है। इस समस्या को दूर करने के उद्देश्य से इस मेला में कृषि यंत्रों के निर्माताओं एवं विक्रेताओं की व्यावसायिक बैठक (बी॰ टू बी॰ मीट) का आयोजन भी किया जा रहा है। स्थानीय बच्चों एवं कृषि महाविद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के बीच कृषि के प्रति आकर्षण बढ़ाने के उद्देश्य से मेला भ्रमण कराने हेतु उन्हें आमंत्रित किया गया है। मेले में आगंतुकों के लिए बिहारी व्यंजनों का फूड कोर्ट की व्यवस्था भी की गई है।