किऊल नदी बना कचरा का ढेर

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लखीसराय/ संवाददाता-

लखीसराय जिले के सभी नदीयों को निर्मल बनाने एवं जल प्रदूषण को नियंत्रित करने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर बड़ी-बड़ी बातें कही जा रही हैं। नदियों को निर्मल बनाने के लिए लोगों को जागरूक करने हेतु विभिन्न संचार माध्यमों का उपयोग भी किया जा रहा है। यहां तक कि नदियों के तट के सौंदर्यीकरण किए जाने की बात भी प्रचारित की जा रही है। क्षेत्रीय व राष्ट्रीय पार्टियों में नदियों को प्रदूषण मुक्त करने व उसे निर्मल बनाने को लेकर मंच व मोर्चा तक का गठन किया गया है। जमीनी हकीकत इन सबसे अलग है। हकीकत बयां करती किऊल नदी जो आज शहर भर का सार्वजनिक कूड़ेदान बनकर रह गई है। दुकानों व घरों के दिन भर के एकत्रित कूड़े-कचरे को प्रत्येक दिन नदी में बहा दिया जाता है। नदी के किनारे बसे लोगों के घरों से नाला सीधे नदी के गर्भ में गिरता है। बात यहीं खत्म नहीं होती, हद तो यह है कि शौचालयों से निकलने वाला गंदा पानी भी नदियों में ही बहाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारीयों को कोई मतलब नहीं है। प्रशासन के आलाधिकारी भी इस मामले में उदासीन बने रहते हैं। सबकुछ देखने के बावजूद प्रशासन के अधिकारी मौन साधे रहते हैं। इस विषय पर वे कुछ भी बोलने से बचते हैं। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि भी इस मामले में खामोश ही रहते हैं। जनप्रतिनिधि की खामोशी को मौन समर्थन मानकर नदियों को प्रदूषित करने वाले लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। नदी के दोनों किनारे पर अतिक्रमण भी किया जा रहा है। इस ओर कुल मिलाकर किसी का भी ध्यान नहीं है। जिससे नदी दिन-दुनी रात चौगुनी गति से प्रदूषित हो रही है। अगर शीघ्र इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल हो जाएगी। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।