किसनगंज में दो छिपकलियों के साथ धराए दो तस्कर

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किशनगंज: आप छिपकली से परिचित होगे और आप इनकी कीमत से भी वाकिफ होगे। लेकिन आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि दुनिया में एक ऐसी छिपकली भी है, जिसकी कीमत मर्सिडीज व बीएमडब्ल्यू कारों से भी अधिक है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘गीको’ की, जिसका तस्करी कर लाया गया एक जोड़ा सोमवार को बिहार के किशनगंज में पकड़ा गया। उसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है।

‘गीको’ एक दुर्लभ छिपकली है, जो ‘टॉक-के’ जैसी आवाज़ निकालने के कारण ‘टॉके’ भी कही जाती है। इसके मांस से नपुंसकता, डायबिटीज, एड्स और कैंसर की परंपरागत दवाएं बनाई जाती हैं। इसका इस्तेमाल मर्दानगी बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। खासकर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में इसकी बेहद मांग है। चीन में भी चाइनीज ट्रेडिशनल मेडिसिन में इसका उपयोग किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसी एक छिपकली की कीमत कम-से-कम 50 लाख रुपए है। यह छिपकली दक्षिण-पूर्व एशिया, बिहार, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारत, फिलीपींस तथा नेपाल में पाई जाती है। जंगलों की निरंतर कटाई होने की वजह से यह ख़त्म होती जा रही है। सोमवार को किशनगंज में पकड़ी गईं ऐसी ही दो छिपकलियाें की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार तें डेढ़ करोड़ बताई जा रही है।

इस प्रजाति की दो छिपकलियों को दो तस्कर मेघालय से खरीदकर किशनगंज में बेचने वाले थे कि इसके पहले ही पकड़ लिए गए। एसएसबी की 12वीं बटालियन, रेल पुलिस बल (आरपीएफ) व राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) की संयुक्त कार्रवाई में किशनगंज रेलवे स्टेशन परिसर से दो ‘गीको’ छिपकलियों के साथ असम के रहने वाले दो तस्करों अमीदुल अली व सोहर अली को पकड़ा। छिपकलियां जूते के डिब्बे में थीं।

तस्करों ने उन्हें मेघालय की एक महिला से दो हजार रुपसे में खरीदने की बात स्वीकारी है। किशनगंज में उन्हें 10 लाख रुपये में बेचा जाना था। बाद में छिपकलियों को चोरी-छिपे चीन भेजा जाना था, जहां उनकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये हो जाती। गिरफ्तार तस्करों व छिपकलियों को वन विभाग के सौंप दिया गया है।