किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से किसानों की आय में होगी वृद्धि – डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना – बिहार के कृषि विभाग मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य में छोटे छोटे किसानों को संगठित कर सामूहिक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषक उत्पादक संगठन का गठन किया जा रहा है। कृषक उत्पादक संगठन के माध्यम से खेती करने पर फसल उत्पादों के लिए बेहतर बाजार एवं उच्चतम मूल्य प्राप्त कर सकेगा, वहीं दूसरी ओर खेती का लागत मूल्य भी कम होगा लघु किसान कृषि व्यापार संगठन, भारत सरकार की एक संस्था है जिसके माध्यम से कृषक उत्पादक संगठन को 10 लाख रूपये तक का अनुदान मिलता है। इसके लिए कृषक उत्पादक संगठन में उत्पादकों की संख्या कम-से-कम 50 होनी चाहिए। बिहार के विभिन्न जिलों में कृषक उत्पादक संगठन का गठन किया जा रहा है। अब तक आत्मा द्वारा जमुई जिला में 10, कटिहार में 15, मुजफ्फरपुर में 07, वैशाली में 15, गोपालगंज में 11, मधेपुरा में 13, सुपौल में 11, कैमूर में 10, औरंगाबाद में 06 तथा अन्य जिला सहित कुल 127 कृषक उत्पादक संगठन का गठन किया जा चुका है। शेष जिलों में गठन की प्रक्रिया जारी है। नाबार्ड द्वारा भी 122 कृषक उत्पादक संगठन का गठन किया गया है।

मंत्री ने कहा कि कृषक उत्पादक संगठन का प्रमुख उद्देश्य किसानों के उत्पादन से लेकर विपणन तक की सभी समस्याओं का समाधान करना है। राज्य में औसतन 95 प्रतिशत लघु एवं सीमांत किसान हैं। इन किसानों की जोत छोटे होने के कारण किसी विशेष फसल का उत्पादन काफी कम होता है। फलस्वरूप उन्हें स्थानीय बाजार में बेचना पड़ता है अथवा औने-पौने भाव में बिचैलियों के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री करनी पड़ती है, जिससे उनके उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। अगर कई किसान मिलाकर कृषक उत्पादक संगठन बनाकर खेती करते हैं तो उत्पाद की मात्रा काफी अधिक होती है और व्यवसायी स्वयं किसानों से संपर्क करते हैं अथवा किसान भी ई-मार्केटिंग के माध्यम से अपने उत्पाद को उचित मूल्य पर बेचते हैं। उन्होंने पदाधिकारियों को राज्य के प्रत्येक प्रखंड में 01-01 कृषक उत्पादक संगठन के गठन करने का निदेश दिया।

उन्होंने कहा कि देश में वर्ष 2011-12 में किसान उत्पादक संगठन के गठन का कार्य प्रारम्भ किया गया था, जिसे लघु किसान कृषि व्यापार संगठन के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता था। कृषक उत्पादक संगठन उत्पादकों का एक संगठन है, जिसमें उत्पादक ही शेयरधारक होते हैं तथा इसका स्वामित्त्व एवं संचालन भी उत्पादक द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि कृषक उत्पादक संगठन के गठन में कम-से-कम 10 उत्पादक का होना आवश्यक है।