किसान के विकास के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – डाॅ॰ प्रेम कुमार

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गया – देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा डी॰डी॰ किसान चैनल, नरेन्द्र मोदी ऐप के माध्यम से देश के सभी जिलों से किसानों के साथ संवाद किया गया। इस अवसर पर बिहार के कृषि विभाग मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने विभागीय पदाधिकारियों, वैज्ञानिकों तथा गया जिला के प्रगतिशील किसानों के साथ कृषि विज्ञान केन्द्र, मानपुर, गया में प्रधानमंत्री के संवाद को सुना। उन्होंने इस संवाद के समाप्ति के उपरान्त कहा कि प्रधानमंत्री के इस संवाद को राज्य के 38 जिलों, सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों, सभी कृषि विश्वविद्यालयों, सभी कृषि महाविद्यालयों में किसानों को सुनने की व्यवस्था की गई थी। इनके अतिरिक्त राज्य के किसानों ने पंचायतों में स्थित काॅमन सर्विस सेन्टर/वसुधा केन्द्र/सहज केन्द्रों पर भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर माननीय प्रधानमंत्री के संवाद को सुना। उन्होंने बताया कि राज्य के 15 हजार से अधिक किसानों द्वारा इस संवाद को सुना गया।

डाॅ॰ प्रेम कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले चार सालों में जमीन के रख-रखाव से लेकर उत्तम गुणवत्ता वाले बीज, बिजली की व्यवस्था तथा बाजार की व्यवस्था का प्रयास किया गया। इन प्रयासों का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आय को दुगुना करना है। इसके लिए सरकार की नीतियों में बदलाव कर कठिनाईयों को दूर करते हुए आगे बढ़ना है। शुरूआत में बहुत लोगों ने इसका मजाक उड़ाया, लेकिन देश के किसानों पर सरकार का पूरा भरोसा है। देश के किसान रिस्क लेने को तैयार है। सरकार द्वारा मुख्यतः चार बिन्दुओं पर बल दिया गया है – लागत को कम-से-कम कैसे किया जाये, फसलों के पैदावार का उचित मूल्य मिल सके, इनकी बरबादी रोका जाये तथा किसानों की आमदनी के लिए वैकल्पिक स्रोत तैयार हो। सरकार द्वारा फसल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए फसलों की न्यूनत्तम समर्थन मूल्य को लागत से डेढ़ गुना किया गया है।

उन्होंने कहा कि न्यूनत्तम समर्थन मूल्य निर्धारित करने में श्रमिकों का परिश्रम, मवेशी पर व्यय, सिंचाई, बीज, उर्वरक, कार्य पूँजी पर ब्याज, किराया के साथ-साथ किसान तथा उनके परिवार की मेहनत को भी शामिल किया गया है। इसके लिए सरकार ने एक निश्चित राशि की व्यवस्था की है। कृषि के बजट को गत चार वर्षों 2014-19 में बढ़ाकर 2,12,000 करोड़ रूपये किया गया है, जबकि यह पिछले सरकार के पाँच वर्षों में 1,31,000 करोड़ रूपये था। इस प्रकार कृषि के लिए बजट लगभग दुगुना किया गया है। यह किसान के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है। अनाज, फल, सब्जी तथा दूध का रिकार्ड उत्पादन हो रहा है। विगत 2 वर्षों में खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन 280 मिलियन टन से अधिक हुआ है। इसी तरह दलहन के उत्पादन में 10.55 प्रतिशत तथा बागवानी के क्षेत्र में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

नीली क्रांति के अंतर्गत मछली उत्पादन में 26 प्रतिशत तथा श्वेत क्रांति के तहत् दूध उत्पादन में 24 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। इस वर्ष सरकार ने पशुपालन तथा मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया है। आज दुनिया में आॅरनामेंटल मछली का व्यवसाय बढ़ा हैैैै, इसको देखते हुए सरकार ने आॅरमेंटल मछली तथा सी-वीड की खेती की दिशा में सार्थक प्रयास किया है। मधुमक्खीपालन पर सरकार का विशेष ध्यान है। पहले जहाँ मधुमक्खीपालन को बढ़ावा देने के लिए 850 करोड़ रूपये का प्रावधान हुआ करता था, वहीं विगत तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर 3 हजार करोड़ रूपये किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को फसलों की बोआई से पहले, बुआई के बाद तथा कटाई के उपरान्त बाजार में बिक्री तक, बीज से लेकर बाजार तक सरकार कैसे सुविधा बढ़ा सके, किसानों को मदद दिलाने में हम आगे बढ़ रहे हैं। बुआई से पहले किस मिट्टी में कौन-सा फसल उगाना है, इसके लिए मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को ऋण की व्यवस्था के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाया गया है। यूरिया की कालाबाजारी तथा मारा-मारी को रोकने के लिए पूर्णतः नीम कोटेड यूरिया किसानों को उपलब्ध कराया गया है। बुआई के बाद फललों की सिंचाई के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत 100 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया जा सका है, ताकि हर खेत को पानी मिल सके। फसलों की कटाई के बाद बाजार को आॅन-लाईन प्लेटफार्म के लिए ई-नाम शुरू किया गया है, जिससे अब बिचौलिए किसान का मुनाफा नहीं मार सकते हैं।