किसान चौपाल के आयोजन से किसानों को हो रहा है व्यापक लाभ – डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना- बिहार के कृषि मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीकी तथा सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने एवं किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान तथा किसानों से योजनाओं के संबंध में उसका फीडबैक प्राप्त करने हेतु किसान चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम पूरे राज्य में एक सघन अभियान के रूप में चलाया जा रहा है। राज्य के सभी जिलों के प्रत्येक प्रखण्ड के सभी पंचायतों में दिनांक 27.12.2017 से ही किसान चौपाल आयोजित किया जा रहा है, जो दिनांक 25.01.2018 तक चलेगा। इसमें प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी, कृषि विशेषज्ञ, प्रखण्ड तकनीकी प्रबंधक, कृषि समन्वयक, पौधा संरक्षण पर्यवेक्षक सहित कृषि विभाग के पंचायत एवं प्रखंड स्तर के कर्मी भाग ले रहे हैं। इसमें कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों तथा नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को भी विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जाता है।

मंत्री ने कहा कि सब-मिशन आॅन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन के तहत सपोर्ट टू स्टेट एक्सटेंशन प्रोग्रामस् फाॅर एक्सटेंशन रिफाम्र्स (आत्मा योजना) अंतर्गत कृषि की आधुनिक नवीनत्तम तकनीकी को किसानों तक पहुँचाने के लिए अनेक प्रसार कार्यक्रमों यथा प्रशिक्षण, प्रत्यक्षण, परिभ्रमण, किसान पाठशाला, पुरूष एवं महिला किसान समूह का गठन, खाद्य सुरक्षा समूह का गठन, किसान मेला, किसान गोष्ठी एवं किसान वैज्ञानिक वार्तालाप आदि का क्रियान्वयन किया जा रहा है। किसान चौपाल के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा संचालित होेने वाली विभिन्न योजनाओं के संबंध में किसानों को जानकारी दी जाती है, जिससे किसान भाई-बहन को काफी मदद मिल रही है।

डाॅ॰ कुमार ने कहा कि किसान चौपाल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न फसलों के उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने के लिए मिट्टी जाँच के आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग, समय से फसल की बुआई, फफुँदनाशी एवं कीटनाशी से बीजोपचार, सिंचाई के लिए जल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, दीमक एवं चूहा नियंत्रण, समेकित कीट प्रबंधन तथा समेकित पोषक तत्त्व प्रबंधन आदि के बारे में किसानों को जानकारी उपलब्ध कराना है। साथ ही, किसानों से आवेदन पत्र प्राप्त करना, बागवानी फसलों विशेषकर सब्जियों के जैविक उत्पादन पर विशेष रूप से किसानों को प्रशिक्षित एवं प्रोत्साहित करना, संबंधित पंचायत के लिए उसके मिट्टी एवं उपलब्ध संसाधन के अनुसार फसल विशेष/एक्टीभीटी का चयन कर खेती करने का सुझाव देना है।