कुशवाहा ने नीतीश सरकार के खिलाफ शंखनाद कर दिया कहा, लालू राज से बदतर नीतीश का सुशासन

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मोतिहारी – रालोसपा के तत्वावधान में राजनैतिक चिंतन शिविर के खुला अधिवेशन समापन समारोह को संबोधित करते हुए छलका उपेन्द्र कुशवाहा का दर्द। उन्होंने कहा कि हमारे साथ अन्याय हुआ है, गठबंधन नियम के अनुसार हमे समानता का दर्जा नहीं मिला। उन्होंने उपमा देते हुए कहा कि समुद्र मंथन से विष भी निकलता है और अमृत भी। विष की भागीदारी में हम बराबर के भागीदार है पर जब अमृत की बारी आई तो हमें भाव नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने शिक्षा सुधार को लेकर भी नीतीश मॉडल को दोषी बताया और कहा कि मैंने बिहार सरकार के समक्ष 25 सूत्री मांगों को रखी पर उसपर भी पहल नहीं किया जा रहा है। मिड-डे मील पर भी उन्होंने प्रहार करते हुए कहा कि मिड-डे मील से शिक्षक को अलग रखना चाहिए।

रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश सरकार के खिलाफ शंखनाद कर दिया है। मोतिहारी में पार्टी के चिंतन शिविर में कुशवाहा ने इस बात का ऐलान कर दिया कि उनकी पार्टी बिहार में नीतीश सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकेगी। कुशवाहा ने कहा कि वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के सामने इस बात का संकल्प लेते हैं कि नीतीश सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकना उनकी पहली प्राथमिकता है।

लालू राज से बदतर नीतीश का सुशासन

उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही 15 साल के लालू – राबड़ी शासनकाल को कोस कर सत्ता की गद्दी पर बैठे हो लेकिन हकीकत यह है कि बिहार में मौजूदा हालात आरजेडी शासनकाल से ज्यादा बदतर हैं। कुशवाहा ने कहा कि बिहार में सुशासन नाम की कोई चीज नहीं है और नीतीश कुमार केवल सत्ता सुख भोगने में व्यस्त हैं।

बीजेपी पर सीधा हमला

चिंतन शिविर में बोलते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने बीजेपी के ऊपर भी सीधा हमला बोला। कुशवाहा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हकीकत में भारतीय जुमला पार्टी है और बिहार बीजेपी के अंदर बैठे नेता नीतीश कुमार के चमचेबाजी में व्यस्त हैं। कुशवाहा ने कहा कि जुमलेबाजी से जनता का भला नहीं हो सकता है और बीजेपी को मंदिर निर्माण जैसे मुद्दे नहीं उठाने चाहिए।

कुशवाहा ने कहा कि मंदिर बनाने का काम साधु संतों का है ना कि राजनीतिक दलों का। कुशवाहा ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर मंदिर निर्माण करना ही था तो बीजेपी ने पिछले 4 साल में यह काम क्यों नहीं किया? कुशवाहा ने उम्मीद के मुताबिक अपनी पार्टी की बैठक में एनडीए को जमकर खरी-खोटी सुनाई है। चिंतन शिविर में एनडीए और मोदी सरकार के खिलाफ खुलेआम बागी तेवर दिखाने के बाद कुशवाहा केंद्रीय कैबिनेट में कितने दिनों तक रह पाएंगे या देखना अब बड़ा दिलचस्प होगा।