केन्द्रीय मंत्री उतरे ‘फरार’ बेटे के पक्ष में

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भागलपुर – बिहार के भागलपुर जिले में साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस ने केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत समेत कई लोगों के खिलाफ नामजद अभियुक्त बनाकर मामला दर्ज किया है। इन लोगों पर दंगा करने एवं हिंसा फैलाने का आरोप लगा है।

एफआईआर के मुताबिक दिनांक 17 मार्च, 2018 को करीब चार बजे चम्पानगर बोरिंग की तरफ से भगवा रंग के झंडा एवं बैनर से सुसज्जित दो-ढाई सौ मोटरसाइकिल जिसमें प्रत्येक मोटरसाइकिल पर 2-3 व्यक्ति सवार होकर जुलूस के साथ दो-चार पहिया वाहन पर डीजे के साथ थे। काफी तेज आवाज में, ‘हिंदुस्तान में रहना है तो जय श्री राम बोलना होगा, हर टोपीवाला भी सर झुकाकर जय श्रीराम बोलेगा’ बजाते जा रहे थे। इसे सुनते ही मुस्लिम समुदाय के लोग आक्रोशित हो गए। पुलिस द्वारा धार्मिक नारा को ठेस पहुंचाने वाला नारा और लाउडस्पीकर बंद करवाने को कहा गया, इसके बावजूद डीजे बज रहा था। इसके बाद दोनों समुदायों के लोगों में गाली गलौज होने लगा। उपद्रवी लोग संगठित होकर हथियार से लैस होकर दंगा-फसाद करने लगे। दोनों तरफ से ईंट-पत्थर चलने लगे जिसमें कई सिपाही जख्मी हो गए। इन सब के बीच एक सिपाही को उपद्रवियों द्वारा चलाई गई गोली लग गई। घायल सिपाही को इलाज हेतु मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सड़क पर आगजनी हुई और कई दूकानें लूट ली गईं। उपद्रवियों के खिलाफ बिना अनुमति के भारी संख्या में जुलूस निकालना, जुलूस में हथियार के साथ शामिल होना, लाउडस्पीकर द्वारा धार्मिक समुदाय को ठेस पहुँचाने वाले नारे लगाना, लाउडस्पीकर को रोके जाने पर बात न मानना इन सभी धाराओं के तहत केस दर्ज की गयी है।

इस कांड में नाथनगर पीएस केस संख्या 176/18 के तहत पुलिस ने केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत समेत 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है – 1. अर्जित शाश्वत, 2. अभय कुमार घोष उर्फ़ सोनु 3. प्रमोद वर्मा, 4. देव कुमार पाण्डेय, 5. निरंजन सिंह, 6. संजय सिंह, 7. सुरेन्द्र पाठक, 8. अनूप लाल शाह, 9. प्रणव साह। (शिकायतकर्ता एस आई हरिकिशोर सिंह)

एक अन्य प्राथमिकी के तहत – 1. बिक्रम यादव, 2. पिंटा यादव, 3. मनीष यादव, 4. पंकज यादव, 5. शंकर यादव, 6. मो. शमी अंसारी, 7. मो. सोनू, 8. मो. मुन्ना, 9. मो. जसीम, 10. ताहा आलम को आरोपी बनाया गया है. (शिकायतकर्ता – एएसआई हरेराम चौधरी)

दोनों ही एफआईआर में कई अंजानलोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है।

IPC की धारा 153 A और 295A ये दोनों धारा संगीन है। ये धाराएं सांप्रदायिक भावना को भड़काने वालों के खिलाफ लगाया जाता है। इसके अलावा बिना इज़ाज़त के जुलूस निकालने और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने संबन्धी धाराएं लगाई गई है। पुलिस ने आरोप लगाते हुए ऑडियो और वीडियो भी मुहैया कराया है जो उस वक्त चल रहा था। इसी आधार पर कार्रवाई भी हुई है।

वहीं केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने अपने बेटे अर्जित शाश्वत चौबे के समर्थन में कहा है कि एफआईआर केवल रद्दी के टुकड़े की तरह है जिसे भ्रष्ट अधिकारियों ने रजिस्टर किया था। मेरे बेटे ने कोई गलती नहीं की है।