कैमूर के ग्रामीणों ने दोहराई माउंटेन मैन की कहानी

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कैमूर: बिहार के गया जिले के दशरथ मांझी को माउंटेन मैन के नाम से नवाजा गया, जिन्होंने पहाड़ काटकर अपने गांव आने जाने का रास्त बना दिया था। कुछ ऐसी ही कहानी दोहरायी गई है रोहतास के कैमूर पहाड़ियों पर बसे औरइयां, भुड़कुड़ा, उरदाग, चपरा और कुसुम्हा गांव के लोगों ने।

इस गांवों में करीब तीन हजार की आबादी समुद्रतल से डेढ़ हजार फीट की ऊंचाई पर बसी है। अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे कंधे पर उठाए पहाड़ियों और पत्थरों को पैदल पार करते घंटों बाद ये लोग ताराचंडी पहुंचते हैं। नेताओं और अधिकारियों के चौखट चूमते-चुमते थक हार कर ग्रामीणों ने फैसला किया की अब वो अपनी तकदीर खुद बदलेंगे।

एक माह पहले आपस में बैठक कर पहाड़ियों को काट कर सड़क बनाने का फैसला लिया। 15 दिनों में लोगों के प्रयास से 2 किमी सड़क का निर्माण किया जा चुका है। शेष सड़क को बनाने में गांव वाले जोरशोर से जुटे हुए हैं।

kaimurग्रामीणों को जिला मुख्यालय चेनारी जाने के लिए 40 किलोमीटर घूमना पड़ता था। जिसे ग्रामीणों ने पहाड़ काटकर रास्ते बना डाले और आज 40 किलोमीटर का सड़क 4 किलोमीटर में बदल गया।

वन विभाग के अधिकारियों की लगातार धमकी ने भी इनलोगों के हौसले नहीं तोड़े। आज चेनारी के पचौरा से औरइया, भुरकुरा, कुशुमा, चपरा, उडदगा जाने के लिए ग्रामीणों को नरवा, भोखरवा तथा गोड़िया घूम कर नही जाना पड़ता है। वो चेनारी प्रखंड मुख्यालय से आराम से अपना गांव पहुंच जाते है। हालांकि सड़कें गाडियों के चलने लायक नहीं बनी है फिर भी पैदल ही गांव में पहुंचने में समय नही लगाता।

औरइया के पूजन प्रजापति तथा बसंत खरवार कहते है कि वन विभाग उनलोगों को धमकी देता है कि पहाड़ तोड़े तो जेल भेज देंगे। लेकिन उनका कहना है कि जब गांव में भी कोई सुविधा नहीं तो जेल में ही रह लेंगे। कोई फर्क नहीं पड़ता है। अमरीक मांझी कुसुम्हा के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि कि हमलोग आसपास के चार-पांच गांव के ढाई से तीन सौ महिला पुरुष रात दिन लगे हैं और यह सड़क जल्द बनकर तैयार हो जाएगा।