कैमूर पहाड़ी पर स्थित मुंडेश्वरी मंदिर, भारत का सबसे पूराना मंदिर

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बिहार के कैमूर जिले के प्रसिद्ध मुंडेश्वरी मंदिर को भारत का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। यह मंदिर 608 फीट ऊंची कैमूर पहाड़ी पर है। कहा जाता है कि इस मंदिर में मन्नत पूरा होने पर भक्त यहां बकरे की बलि देते हैं। वह भी बिना बकरे की जान लिए और खून बहाए बलि दी जाती है।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार माता भगवती ने इस इलाके में अत्याचारी असुर मुंड का वध किया था। इसी से देवी का नाम मुंडेश्वरी पड़ा। मुंडेश्वरी मंदिर पंवरा पहाड़ी पर स्थित है। श्रद्धालुओं के अनुसार मां मुंडेश्वरी से सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। यहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है।

इस मंदिर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा की ओर है। 608 फीट ऊंची पहाड़ी पर बने इस मंदिर के विषय में इतिहासकारों का मत है कि इसे 108 ई. में बनवाया गया था। चीनी यात्री ह्वेनसांग 636-38 के यात्रा विवरण में लिखा है कि पाटलिपुत्र से 200 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम दिशा में एक चमत्कारपूर्ण देव स्थान है, जिसके शिखर से दिव्य ज्योति निकलती है।

यह माना जाता है कि यह मंदिर 108 ईस्वी में बनाया गया। इसे शक शासनकाल में बनाया गया। यह  गुप्त शासनकाल (302 ईस्वी) से पहले का है। यहां पर पाए गए एक शिलालेख पर ब्राह्मी लिपि अंकित है। जबकि गुप्त शासनकाल में पाणिनी के प्रभाव के कारण विशुद्ध संस्कृत का उपयोग किया जाता था। वैसे, यह मंदिर और पुराना भी हो सकता है।

इस मंदिर में पिछले 1900 सालों से आज तक पूजा हो रही है। यहां का अष्टाकार गर्भगृह तब से अब तक कायम है। गर्भगृह के कोने में देवी की मूर्ति है, जबकि बीच में अष्टधातु का चतुर्मुखी शिवलिंग हैं।

मुंडेश्वरी देवी कौन हैं इसपर लोग एकमत नहीं है क्यूंकि इस रूप की देवी को कहीं और नहीं देखा गया| अष्टधातु का चतुर्मुखी शिवलिंग भी अपने आप में अनूठा है| पहाड़ी पर स्थित मन्दिर तक जाने के रास्ते के दोनों तरफ़ गणेश, शिव, पत्थर की अन्य कलाकृतियाँ बिखरी पड़ी मिलती हैं|