कोटला में भारत को मिली 11 साल बाद हार

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दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को छह रनों से हरा दिया है। इसके साथ ही पांच वनडे मैचों की सीरीज 1-1 की बराबरी पर आ गई है। इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में भारतीय टीम के सामने जीत के लिए 243 रनों का लक्ष्य रखा था। लेकिन टीम इंडिया 236 रनों पर सिमट गई। भारतीय टीम को फिरोजशाह कोटला मैदान पर 11 साल बाद हार मिली है।

कप्तान केन विलियमसन के शतक और लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम 236 रनों पर ही ढ़ेर हो गई। विलियमसन ने 118 रन बनाये जो किसी कीवी कप्तान का भारत के खिलाफ सर्वोच्च स्कोर है। उन्होंने अपनी पारी में 118 गेंदों का सामना किया तथा 14 चौके और एक छक्का लगाया। विलियमसन ने इस बीच टाम लैथम (46) के साथ दूसरे विकेट के लिये 120 रन की साझेदारी की।

भारत ने हालांकि अंतिम दस ओवरों में शानदार वापसी करके केवल 40 रन दिये और इस बीच छह विकेट लिये। इस कारण न्यूजीलैंड नौ विकेट पर 242 रन ही बना पाया। भारतीय बल्लेबाज शुरू से ही परिस्थितियों से सामंजस्य नहीं बिठा पाये। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (39) और केदार जाधव (41) ने छठे विकेट के लिये 66 रन जोड़कर उम्मीद जगायी जबकि हार्दिक पंड्या की 32 गेंदों पर 36 रन की पारी ने दर्शकों में जोश भरा लेकिन आखिर में भारत 49.3 ओवर में 236 रन पर आउट हो गया।

न्यूजीलैंड ने इससे पहले भारत को वनडे में उसकी सरजमीं पर 2003 में कटक में हराया था। इस बीच उसने वनडे में भारत से उसकी धरती पर सात मैच गंवाये थे। यही नहीं वर्तमान दौरे में टेस्ट श्रृंखला 0-3 से गंवाने और धर्मशाला में पहले वनडे में करारी हार के बाद कीवी टीम ने पहली जीत का स्वाद चखा। इसके साथ ही फिरोजशाह कोटला में भी भारत का पिछले 11 साल से किसी भी प्रारूप में चला आ रहा विजय अभियान थम गया।

धोनी ने एक छोर पर टिककर दूसरे छोर से बल्लेबाजों को लंबे शाट खेलने की छूट देते रहे लेकिन तभी उनकी पुश की गयी गेंद को गेंदबाज साउथी ने अपने दायीं तरफ डाइव लगाकर कैच कर दिया। विलियमसन ने तुरंत कामचलाउ स्पिनर मार्टिन गुप्टिल को गेंद थमायी और उन्होंने एक ओवर में अक्षर पटेल (17) और अमित मिश्रा (1) को आउट करके अपने कप्तान के फैसले को सही साबित किया। इससे पहले एक समय लग रहा था कि न्यूजीलैंड बड़ा स्कोर बनाने में सफल रहेगा। उसने 40 ओवर तक तीन विकेट पर 202 रन बनाये थे और लग रहा था, लेकिन अंतिम दस ओवरों में पासा पलट गया। आलम यह था कि 38वें ओवर के बाद 50वें ओवर में जाकर गेंद ने सीमा रेखा का दर्शन किया।

भारत ने टॉस जीतने के बाद शानदार शुरूआत की थी। उमेश की दूसरी गेंद ही कातिल थी जिस पर दुनिया का कोई भी बल्लेबाज गच्चा खा जाता फिर मार्टिन गुप्टिल की क्या बिसात जो इस श्रृंखला में शुरू से रन बनाने के लिये तरस रहे हैं। गुडलेंथ पर पिच करायी गयी इस गेंद में तेजी, सटीकता, हल्की स्विंग सब कुछ था जिसने गुप्टिल का आफ स्टंप थर्रा दिया। गुप्टिल इस दौरे में टेस्ट और वनडे की कुल आठ पारियों में अभी तक 21.37 की औसत से 171 रन ही बना पाये हैं।
लैथम सहज होकर खेल रहे थे लेकिन कामचलाऊ गेंदबाज केदार जाधव ने आते ही अपनी धीमी गेंद पर उन्हें गच्चा दे दिया। पगबाधा की जोरदार अपील पर अंपायर अनिल चौधरी की उंगली उठ गयी। लैथम इस तरह से दौरे में पहली बार किसी मैच में अर्धशतकीय पारी नहीं खेल पाये। रोस टेलर (21) ने मिश्रा पर स्लाग स्वीप से बड़ा शाट खेलने के प्रयास में रोहित को कैच थमा दिया।

दूसरी तरफ विलियमसन ने शुरूआती परेशानियों से उबरकर 109 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया। यह वनडे में उनका आठवां और भारत के खिलाफ पहला शतक है। शतक पूरा करने से पहले हालांकि उनके हाथ में चोट लगी थी। आखिरी दस ओवरों में कहानी एकदम से बदल गयी। मिश्रा ने कोरे एंडरसन (21) और विलियमसन को आउट करके डेथ ओवरों के लिये न्यूजीलैंड की लय बिगाड़ दी। मिश्रा की खूबसूरत गेंद पर विलियमसन ने उतनी ही खूबसूरती से शाट लगाया लेकिन रहाणे ने लांग आन पर उनसे भी अधिक खूबसूरती से उसे कैच में तब्दील कर दिया। निचले क्रम के बल्लेबाजों में कोई भी अपेक्षित पारी नहीं खेल पाया। इन दस ओवरों का अन्य आकषर्ण अक्षर पटेल का एंटन डेविच का एक हाथ से लिया गया कैच था।