खंडहर में तब्दील हुआ बिहार का यह स्कूल

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रोहतास: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिक्षा मंत्री भले ही लाख दावे कर ले की बिहार के शिक्षा प्रणाली को समुचित मजबूती प्रदान किया जा रहा है। सर्व शिक्षा अभियान का वो नारा- सब पढ़े सब बढ़े, आधी रोटी खायंगे फिर भी स्कुल जायंगे, ये नारे सिर्फ दीवार पर पढ़ने में ही ठीक लगता है। धरातल पर बात करें तो यह बिल्कुल ही एक धुंधली तस्वीर की तरह नजर आती है साथ ही सरकार के सारे दावों को झुठलाती है।

जी हां हम बात कर रहे है बिहार के रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड के श्रीनगर उच्च विद्यालय सुकहरा डिहरी की। जहां बच्चों और शिक्षकों से भरा एक विद्यालय है। वहां सबकुछ है बच्चे भी है शिक्षक भी है। समय की पाबंदी भी है। लेकिन यहां छात्रों की पढाई की पूरी व्यवस्था नहीं है। यहां छात्रों को बैठने के लिए खुली आसमान और जमीन के शिवा कुछ नहीं है।

कोई भी मौसम हो लेकिन छात्र पढ़ने के लिए विद्यालय तो आते है। लेकिन खुले आसमान और जमीन पर दरी या चटाई बिछा कर पढ़ने को मजबूर और लचार है। यह कोई प्राथमिक या मध्य विद्यालय नहीं है बल्कि एक उच्च विद्यालय है। जिसका अपना एक इतिहास है लेकिन आज सरकार के उदासीनता और शिक्षा प्रणाली में खोटी व्यवस्था के कारण एक वीरान खंडहर में तब्दील हो कर अपना इतिहास खोता जा रहा है।

रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड के श्रीनगर उच्च विद्यालय सुकहरा डिहरी विद्यालय की स्थपना सन 1952 में हुआ था। तब यह विद्यालय काराकाट का दूसरा विख्यात विद्यालय हुआ करता था। इस विद्यालय ने एक से एक अधिकारी नेता और प्रसिद्ध लोगों को उत्पन्न किया। लेकिन आज इसकी हालत देखकर किसी भुतहा फिल्म की खंडहर की याद दिलाता है।

सरकार के अक्षम निति का शिकार यह विद्यालय अपनी प्राचीन इतिहास को खोता जा रहा है। सरकार भले ही लाख दावे कर ले की शिक्षा व्यवस्था में हम सुधार कर रहे है। हर जगह समुचित व्यवस्था की जा रही है। नीतीश कुमार की सरकार तीसरी बार सूबे में बनी लेकिन आज तक इस विद्यालय का कुछ नहीं हुआ।

काराकाट एक लोकसभा क्षेत्र भी है और यहां के सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा सिर्फ वोट लेने के लिए ही इन क्षेत्रो का दौरा करते है। साथ ही सत्तापक्ष के विधायक भी इस विद्यालय के हालात को जानना मुनासिब नहीं समझते है।

श्रीनगर उच्च विद्यालय की हालत इतनी खराब और जर्जर हो गई है की यहां का क्लास रूम में झड़ियां और पेड़ उग आये है। जिसमें अनेक प्रकार के जीव जंतु रहते है। विद्यालय के कार्यालय और दो क्लास रूम के आलावा सिर्फ खंडहर ही खंडहर नजर आता है। दो क्लास रुम में छह सौ बच्चे बैठ कर पढ़ाई करते है। आप इनकी पढ़ाई के बारे में सोच सकते है। कैसी होती होगी इनकी पढ़ाई।

1952 में स्थापित यह विदयालय अपने ही हालात और सरकार की उदासीनता पर आंसू बहाने को मजबूर है। आखिर सरकार कदाचार मुक्त परीक्षा लेने की बात तो कर रही है। क्या ऐसी व्यवस्था में यह संभव है ? जब बच्चों का पूरा कोर्स समय पर पूरा नहीं हो पाता है। तो फिर सरकार कैसे इस कदाचार मुक्त परीक्षा की कल्पना कर सकती है। सक्षम घर के बच्चों की पढाई तो कोचिंग टियुशन के द्रारा पूरा हो जाती है लेकिन जिनके पास दो जून की रोटी की किल्लत हो उनके बच्चे की पढ़ाई कैसे पूरी होगी? यह सोचने वाली बात है।

इस स्कूल के बच्चों की माने तो वह कहते है कि इस स्कूल में हमेशा डर की साये में पढ़ते है कभी आंधी का डर कभी भूकंप का डर तो कभी विषैले जीव जंतु का डर। डर के साये में ये बच्चे कैसे अपनी पढ़ाई पूरा कर पाएंगे। गर्मी, जाड़ा और बरसात के दिनों में खुले आसमान के नीचे दरी और चाट बिछाकर पढ़ते ये बच्चे सरकार और उनके अधिकारियों से एक बात पूछते है कि क्या हम हमेशा ही डर के साये में ही बैठ कर पढ़ें। हमरी पढाई आखिर कैसे पूरी होगी ?

श्री नगर उच्च विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य दीनानाथ सिंह की माने तो कई बार लिखित शिकायत विभाग से लेकर अधिकारियो तक लगा चुके है लेकिन आज तक एक ईंट का भी कार्य नहीं हुआ। यह विद्यलय उच्च माध्मिक में अपग्रेड हो चूका है। लेकिन सिर्फ नामंकान के लिए नहीं पढ़ाई के लिए भी।

इस विद्यालय में इंटर कला और विज्ञान में भी इस साल नमांकन हुआ है लेकिन पढाई नहीं होता है कारण एक तो इंटर कला में सिर्फ चार शिक्षक है जबकि साइंस में एक भी शिक्षक नहीं है फिर भी नामांकन हुआ है। दूसरा यह की महज दो कमरे और एक कार्यालय में कैसे पढ़ेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि एक कार्यालय में शिक्षक भी बाहर बैठते है। उसी कार्यालय में लैब का समान भी है पुस्तकालय भी उसी में, प्राचार्य भी उसी में यानि सबकुछ एक ही कार्यालय रूम में मौजूद है। इस विद्यालय में एक भी शौचालय नहीं है जहां करीब 300 से जायदा छात्राएं पढ़ती है।

बरहाल जो भी हो लेकिन बिहार की शिक्षा नीतियों में अभी काफी कमी है। श्रीनगर उच्च विद्यालय तो अभी एक विद्यालय है ऐसे कितने विद्यालय है जिसमे मूलभूत सुविधाएं नहीं है। एक विद्यालय के लिए जो सुविधाएं होनी चाहिए उनमें सबसे पहले समुचित पढ़ने के लिए क्लास रूम, कामन रूम पुस्तकालय, लैब ,खेल के मैदान, शौचालय, शिक्षक और सुरक्षा व्यवस्था। लेकिन जहां सिर्फ दो रूम के भरोसे कैसे पढ़ाई होगी यह कल्पना से परे है।