खरीफ मौसम के आगमन के पूर्व खुदरा उर्वरक विक्रेता कर लें आवश्यक तैयारी -डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना – बिहार के कृषि विभाग मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार में उर्वरकों का कालाबाजारी रोकने एवं किसानों को समय पर सुलभ तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पहली जनवरी, 2018 से उर्वरक क्षेत्र में खुदरा बिक्री केन्द्रों पर पी॰ओ॰एस॰ मशीन के माध्यम से उर्वरक बिक्री करना अनिवार्य कर दिया गया है। पी॰ओ॰एस॰ मशीन से उर्वरक बिक्री शुरू होने के बाद यह पहला खरीफ का मौसम होगा, जिसमें पी॰ओ॰एस॰ तकनीक के माध्यम से राज्य में उर्वरक बिक्री की जाएगी। इस कार्यक्रम से जुड़े सभी स्टेक होल्डर्स के लिए यह मौसम काफी महत्त्वपूर्ण होगा। यदि इस मौसम में पी॰ओ॰एस॰ प्रणाली को सफलतापूर्वक कार्यान्वित कर लिया जाये तो इसे राज्य, उर्वरक व्यवसाय एवं किसानों के हित में एक क्रांतिकारी कदम माना जाएगा, जिसे आम जन, दशकों तक याद रखेंगे।

उन्होंने कृषि विभाग के पदाधिकारियों/कर्मचारियों, राज्य में उर्वरक व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों एवं किसानों से इस महत्त्वाकांक्षी एवं नेक पहल को सफल बनाने का अपील किया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर जिला स्तर पर उर्वरक कंपनी के प्रतिनिधियों के माध्यम से पी॰ओ॰एस॰ मशीन के संचालन हेतु प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रिटेलर अवश्य भाग लें। थोक विक्रेताओं के प्रतिनिधि भी प्रशिक्षण में भाग ले सकते हैं। रिटेलर स्थानीय स्तर पर बेहतर नेटवर्क कनेक्टिविटी वाला मोबाइल प्रदाता सेवा का चयन स्वयं करें। उन्होंने बताया कि पी॰ओ॰एस॰ मशीन के संचालन हेतु दिए गए पिन की गोपनीयता बनाये रखें। अगर कोई तकनीकी कठिनाई हो तो राज्य, जिला, प्रखंड स्तर पर कार्यरत हेल्पडेस्क तथा सेवा प्रदाता का सहयोग लें। अद्यतन उर्वरक की मूल्य तालिका एवं भंडार की स्थिति अवश्य अपने बिक्री केंद्र पर प्रदर्शित करें।

डाॅ॰ कुमार ने कहा कि जिला के थोक उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिनिधि, अपने स्टाफ को क्षेत्र एवं ग्रामीण स्तर पर फैसिलिटेटर के रूप में विकसित करें। किसानों को आधार कार्ड की उपयोगिता तथा कार्यक्रम की जानकारी दें। किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड की अनुशंसा के आलोक में उर्वरक का व्यवहार करने के लिए जागरूक करें तथा उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से उर्वरक की खरीद समय से पूर्व करने के लिए प्रेरित करें, ताकि वे पीक सीजन में खरीददारी की भीड़-भाड़ एवं तनाव से बच सकें। स्थानीय स्तर पर जिस उर्वरक की माँग ज्यादा हो, उसकी उपलब्धता बनाये रखें।