गया में पिंडदानियों की सेवा में लगी किन्नर

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गया: बिहार के गया में 15 दिनों तक चलने वाली पितृपक्ष मेला को लेकर लोगों की खासी भीड़ इकठ्ठा हो रही है। महासंगम के लाखों तीर्थयात्री अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करने गयाजी आये आते हैं।

गया में आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन के साथ ही स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं कई संगठन अपनी सेवा दे रहे हैं। उसी में किन्नर भी अपनी सेवा भावना को लेकर पिंडदानियों की सेवा में लगी है।

अखिल भारतीय किन्नर सदाबहार विकास समिति ट्रस्ट के सचिव सुरेश किन्नर अपने किन्नर मंडलियों के द्वारा शहर में बच्चों की बधाई के पैसे से समाज सेवा करने में जुटी है। वह पिछले कई वर्षों से सामाजिक कार्यो में लगी है। वह खुद मेला क्षेत्र के शिविरों में पिंडदानियों की सेवा करती है।

विष्णुपद मन्दिर से श्मशान घाट की तरफ जाने वाली सड़कों के किनारे जयप्रकाश आंदोलन के सेनानी मुरारी दूवेदी अपनी जिंदगी के आखिरी पल भी तीर्थयात्रियों की सेवा में न्योछावर कर दिया। ये युगायुर्वेद शोध संस्थान के निदेशक आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से गया आये तीर्थयात्रियों का इलाज कर रहे है। श्रद्दालुओं के लिए मुफ्त में चिकित्सा का भी इंतजाम कर अतिथि देवो भव के रूप में सेवा की जा रही है।

गया के पितृपक्ष महासंगम में पिंडदान के लिए देश भर से आये तीर्थयात्रियों की सेवा कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन कर रहें हैं। कोई तीर्थयात्रियों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था कर रहा है तो को किसी ने चाय-एवं पानी के साथ ही बिस्किट बांटने का जिम्मा लिया है। कहीं बीमार तीर्थयात्रियों को मुफ्त इलाज कर दवा दी जा रही है तो कई बैंक तीर्थयात्रियों को छुट्टा पैसा देने की व्यवस्था कराये हुए हैं।

वहीं इस सेवा में महिलायें भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। जिला प्रशासन की व्यवस्था से इतर स्थानीय लोगों की तरफ से की जा रही सेवा से यहां आने वाले तीर्थयात्री भी काफी खुश नजर आ रहें हैं। इन तीर्थयात्रियों की मानें तो निश्चित रूप से गयाजी के लोगों की सेवा की भावना से लोगों को सद्कर्म के प्रति प्रेरित करता है।

अतिथि देवो भव की हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति की प्राचीन परंपरा है और इस परंपरा का पालन गयाजी के लोग खुले मन से कर रहें हैं। जिससे यहां पिंडदान करने आ रहे तीर्थयात्रियों की संतुष्टि दोगुणी हो जा रही है।