गरीब और वंचित लोगों के प्रति सरकार है प्रतिबद्ध – श्याम रजक

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पटना – शुक्रवार को ए.एन. सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान में माई सिटी एलायंस फॉर अर्बन पूअर इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसाइटी के द्वारा एक राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में ‘शहरी गरीबों के लिए आधारभूत सेवाओं को बढ़ावा देने के अवसर’ पर परिचर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि और बिहार के उद्योग मंत्री श्याम रजक ने कहा कि “गरीबी सिर्फ बिहार की समस्या नहीं है। यह पूरे देश के लिए एक बड़ी चुनौती है। गांवों में रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण लोग शहर की ओर पलायन कर रहे हैं और शहर में कम अवसर होने के कारण ये लोग गरीबी में जीने को मजबूर हैं।

रजक ने कहा कि शहरीकरण बढ़ रही है और जनसंख्या बढ़ने के कारण शहरों पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। शहरों पर दबाव न बढ़े इसके लिए जरुरी है कि गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं। उन्होंने दलित उद्यमी योजना समेत कई अन्य सरकारी योजनाओं का भी जिक्र किया तथा गरीब और वंचित लोगों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी दुहराई। उन्होंने अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई पर भी अपनी चिंता जाहिर की।

इससे पूर्व दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत दूरदर्शन बिहार के निदेशक राजकुमार नाहर, पर्यावरणविद सौम्या दत्ता और अन्य अतिथियों ने की। सौम्या दत्ता ने सबों को संबोधित करते हुए कहा कि शहर में कुल आबादी के 40 फीसदी लोग रहते हैं और फिर भी 70 फीसदी से ज्यादा प्रदूषण शहरों से आता हैं। एक बोतलबंद पानी को तैयार करने में आधा किलो कोयला जलाने जितना ऊर्जा का उपयोग होता हैं। एक कलम का भी बुरा असर पर्यावरण पर पड़ता हैं। इसलिए पर्यावरण के संरक्षण के लिए अपने रोजमर्रा की जिंदगी में बदलाव की जरूरत हैं। पेड़ लगाने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा।

दूरदर्शन बिहार के निदेशक राजकुमार नाहर ने कहा की सरकार की शहरीकरण से जुड़ी जो योजनायें हैं जिसके बारे में दूरदर्शन के माद्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है. कार्यक्रम के दौरान इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसाइटी के सोनू हरि ने शहरी गरीबों पर किए गए अपने एक अध्ययन के बारे में लोगों को बताया। बिहार के तीन शहरों पटना, मुजफ्फरपुर और गया में किये गये इस अध्ययन में उन्होंने शहर के बेघर लोग जो स्टेशन, सड़क किनारे, ओवरब्रिज के नीचे रहने वाले लोगों से बात की। अध्ययन में हरि ने यह पाया कि सबसे अधिक बेघर 25-35 वर्ष की आयु वर्ग के लोग हैं तथा इनमें सबसे ज्यादा संख्या अनुसूचित जाति और जनजाति की है और फिर ओबीसी।

वहीं इन बेघर लोगों में से सिर्फ 12 फीसदी लोगों को यह मालूम हैं कि उनके लिए सरकार द्वारा रैन बसेरा की व्यवस्था की जाती हैं। इन लोगों तक सरकार सेवाओं का लाभ भी नहीं पहुंच पाता हैं क्योंकि ऐसे लोगों में से 22 फीसदी के पास किसी प्रकार का कोई पहचान पत्र नहीं होता हैं। पूरे दिन चले इस कार्यक्रम में इसके अलावा जल जीवन हरियाली और गवर्नेंस पर भी चर्चा की गई. कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्त्ता, जन प्रतिनिधि भी शामिल रहे.

विभिन्न क्षेत्रों से आये समुदाय के लोगों ने बताया कि सुपौल के रेन बसेरा में जो बेघर रहने के लिए जाते हैं उनसे 30 रुपए एक बेड के लिए जाते हैं जो NUML के नीति के विरुद्ध है। इस संदर्भ में जवाब देते हुए राज्य स्तरीय शेल्टर मॉनिटरिंग कमिटी के मेंबर मोहम्मद तारिक ने आने वाले मीटिंग में रखने का आश्वासन दिया।