गांधी सेतु का पहला विकल्प बना आरा-छपरा पुल, बन कर तैयार

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आरा/ संवाददाता-

आरा-छपरा पुल बन कर तैयार हो गया है जिसे गांधी सेतु का पहला विकल्प माना जा रहा है। पर इतना भर से अभी कुछ नहीं होने वाला है। जिस गांधी सेतु को उतरी बिहार का लाइफ-लाइन माना जाता है। उसका विकल्प के तौर पर अभी कुछ नहीं है। हां, एक बात जरूर है कि आरा-छपरा पुल बन जाने से शहर वासियों को थोड़ी बहुत राहत जरूर मिली है। हालांकि अभी पुल पर फिनिशिंग का काम चल रहा है । एक्सपेंशन ज्वाइंट को फिट किया जा रहा है। आरा के बबुरा छपरा के डोरीगंज के इस पुल पर लोग चढ़ रहे हैं। आरा-छपरा पुल का निर्माण विभाग के मिशन 11 जून के एक हिस्सा है। 11 जून को एक साथ पांच पुलों का उद्घाटन होने को है। जिसमे आरा-छपरा पुल और दीघा-सोनपुर सड़क पुल सर्वोच्च प्राथमिकता में है। जुलाई में आरा-छपरा पुल का निर्माण कार्य शुरु हुआ था । जमीन अधिग्रहण, फारेस्ट क्लियरेंस और नदी के धार में परिवर्तन के वजह से इसमें काफी विलंब हुआ । निर्माण कार्य आरंभ होने के बाद इस पुल के लिए एक्स्ट्रा डोज तकनीक को लिया गया । इसकी डिजाइन विदेशी कंसल्टेंट से आती थी। इस प्रक्रिया में भी इसके निर्माण में देरी हुई । इस पुल के आरंभ होने के बाद आरा की ओर से आने वाले उतर बिहार की ओर जाने वाले वाहनों को गांधी सेतु से गुजरने की जरूरत नहीं होगी । एप्रोच रोड भी लगभग बन कर तैयार है। पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने बताया कि आरा-छपरा पुल का एप्रोच रोड भी लगभग तैयार है । आरा के कोईलवर होते हुए बबुरा से इस पुल पर चढ़ने के लिए एप्रोच रोड तय योजना के हिसाब से पुरा कर लिया गया है। वही छपरा के तरफ से डोरीगंज साइड से पुल का एप्रोच रोड तैयार तो है। पर उसे पन्द्रह दिन में पूरा कर लिया जाएगा। पुल के ऊपर वाले हिस्से का काम भी अब सिर्फ फिनिशिंग के स्टार पर है।

आरा-छपरा पुल की एक झल्की—

लागत की प्रशासनिक स्वीकृति : 676 करोड़
निर्माण के आरंभ की तिथि : 5-7-2010
निर्माण पूर्ण होने की तिथि : 4-7-15
पुल की लम्बाई : 4000 मिटर
एप्रोच रोड की लंबाई : आरा से 16 किमी व छपरा से 0•09 किमी