गांव, गरीब, किसान, युवा, बुजुर्ग और महिलाओं को अपमानित व विश्‍वासघात करने वाला है बजट : पप्‍पू यादव

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पटना – जन अधिकार पार्टी (लो) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सह पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्‍पू यादव ने दूसरी बार केंद्र में आयी मोदी सरकार के पहले बजट पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बार का आम बजट गांव, गरीब, किसान, युवा, बुजुर्ग और महिलाओं को अपमानित व विश्‍वासघात करने वाला है। बजट के साथ सब कुछ समाप्‍त हो गया। हेल्‍थ पर भी सरकार की उदासीनता नजर आई। बजट में बिहार को न विशेष राज्‍य मिला, न विशेष पैकेज मिला, न ही एम्‍स। केंद्र की मोदी सरकार ने बजट में बिहार को धोखा दिया। गरीबों की जिंदगी को नासूर बनाने वाला बजट है। वहीं, पार्टी ने भी केंद्रीय बजट को महंगाई बढ़ाने वाला और अमीरों के हित में सुनहरे सपने दिखाने वाला बजट बताया। राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एजाज अहमद ने कहा कि यह बजट पूरी तरह से अमीरों के हितों को देखते हुए, उद्योग पतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है।

इससे पहले उन्‍होंने मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार पीडि़तों के लिए आयोजित मेडिकल कैंप के दौरान प्रेस वार्ता कर कहा कि बिहार में 30 सालों से जंगलराज और माफियाराज चल रहा है, जिसमें बिहार की जनता पिस रही है। उन्‍होंने कहा कि चमकी बुखार से अब तक 350 मौतें हो चुकी हैं। सरकार मरने वालों की पूरी संख्‍या छुपा रही है। 172 लोग ही नहीं मरे हैं। उन्‍होंने पूछा कि आखिर क्‍या वजह है कि इस मामले में जिसकी लापरवाही है, उस पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई? न तो सदन में इस मामले में दोषी लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की गई?

उन्‍होंने कहा कि लगातार गरीबों की मौतें हो रही है। लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं है। 90 प्रतिशत बच्‍चे यहां कुपोषित हैं, जिनके लिए हम लगातार मेडिकल कैंप कर रहे हैं, जो तीन महीनों तक चलेगा। कल भी हमने मीनापुर में कैंप लगाकर पीडि़तों का इलाज किया और आज भी यह कैंप जारी है। कल वैशली में हम मेडिकल कैंप लगाने वाले हैं। इस दौरान हमने पाया कि 20 से 30 प्रतिशत बच्‍चे बीमार हैं। कहीं कोई अवेयरनेस नहीं है। इसलिए मेरा सवाल है कि क्‍या अब बिहार को नया जनादेश की जरूरत नहीं है? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाथ खड़े कर लिये हैं, तो क्‍या अब बिहार की गरीब कुपोषित जनता यूं ही मरती रहेगी। यह हमें समझने की जरूरत है और इसलिए हम कह रहे हैं कि जंगलराज और माफियाराज से मुक्ति के लिए बिहार को नये जनादेश की जरूरत है।