गैलेंट्री मेडल लौटाएगा शहीद का परिवार

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भोजपुर – शहीदों के मजार पर लगेंगे हर बरस मेले वतन पर मरने वालों का बाकी बस यही निशां होगा। इस बात को सुनते और कहते बड़ा अच्छा लगता है, मगर वतन पर मरने वालों के परिवार पर उसके लाल के मरने के बाद क्या बीतता है, इसका जीता जागता नमूना भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड के कोल्हरामपुर गांव में देखने को मिल रहा है।

दरअसल राकेश कुमार गोवा के नौसेना में पोस्टेड थे, अपने साथियों को बचाने के क्रम में मौत को गले लगा लिया था। घटना 10 जून 2016 की है, गोवा के कारवार में शिप पर राफ्टिंग करते वक्त गैस लीकेज हो गया था। जिसके कारण नेवी के जवान राकेश कुमार और एक शिप के क्रू मेम्बर की मौत हो गई थी, शहीद राकेश ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए गैस लीकेज के क्रम में ही दो क्रू मेम्बर को अपने जान जोखिम में डाल कर उन्हें बचा लिया। जब इस बात की जानकारी हुई कि एक और क्रू मेम्बर अंदर फंसा है तब राकेश फिर अन्दर बचाने के लिए गया लेकिन गैस का रिसाव इतना भयावह था कि सिप को पूरी तरीके से अपने आगोस में ले लिया। राकेश क्रू मेम्बर को अपने कंधे पर रखकर ला रहा था तभी क्रू मेम्बर की रस्ते में मौत हो गयी और शव को जहाज के बाहर लाने का प्रयास किया, मगर गैस का रिसाव इतना तेज था कि राकेश गैस के प्रभाव को सह ना पाया और उसके प्राण पखेरू उड़ गए।

बता दें कि राकेश कुमार भोजपुर जिले के कोल्हरामपुर गांव का रहने वाला था। उनके पिता पटेल कुमार को जैसे ही उनके पुत्र के मरने की खबर मिली थी उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और देखते ही देखते एक महीने के अन्दर राकेश के पिता ने भी हार्ट अटैक होने के कारण दम तोड़ दिया। राकेश 2 जनवरी 2012 को उड़ीसा की चिल्का में ज्वाइन किया था। राकेश के कार्य से उसे सभी लोग बहुत सराहा करते थे। हर कोई राकेश को बहुत चाहता था, वह अपने विंग में बहुत ही प्रचलित था। हंसता चेहरा और जिंदादिल इंसान होने के कारण राकेश हर किसी का चहेता था।

गौरतलब है कि शहीद राकेश के मरने के बाद भारत सरकार ने उसे मरणोपरांत नौसेना गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया था। और भारत सरकार ने उनके मरने के बाद उनके परिवार से कई वादे भी किए थे जिसमें राकेश को सात लाख रूपये देने की भी बात हुई थी। मगर आज तक राकेश के परिवार को ना तो सात लाख रूपये मिले, और ना ही भारत सरकार का कोई नुमाइंदा उनके परिवार से मिलने आया। मरने के बाद राकेश के परिवार को स्थानीय सांसद आरके सिंह ने भी बड़े बड़े वादे किए थे, मगर उनके मरने के 2 साल बीत गए और आज तक सांसद उनके परिवार का हाल तक पूछने नहीं पहुंचे।

अब राकेश की परिवार की स्थिति दाने-दाने को मोहताज हो गई है। ऐसे में राकेश की बहन और माँ ने कहा है कि मेरा भाई कोई शराब पीकर नहीं मरा है जो हम लोगों को अफसोस है। सरकार ने कई वादे किए थे और कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया जिससे आहत होकर हम लोग सरकार के द्वारा दिया गया मेडल सरकार को वापस कर देंगे। आज राकेश के परिवार की स्थिति को देख कोई भी सकते में पड़ जाएगा कि जिसका लाल देश की रक्षा करते-करते अपने साथियों को बचाने के क्रम में मौत को हंसते-हंसते गले लगा लिया, उसका परिवार आज दाने-दाने को मोहताज है। तब एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा होता है कि आखिर सरकार ऐसे जवानों को और उनके परिवार को क्यों तड़पा रही है?