चमकी बुखार से लड़ने को तैयार है सदर अस्पताल

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सुपौल – मुजफ्फरपुर में कहर बरपाने के कारण चमकी बुखार को लेकर सुपौल जिले में भी तरह-तरह की भ्रांतियां व आशंकाएं लोगों को होने लगी है। यही कारण है कि तेज बुखार के बाद चमकी आने से लोगों को चमकी बुखार की आशंकाएं होने लगती है। पिछले तीन दिनों से कमोवेश इसी तरह की बातें जिले में भी देखने को मिल रही है।

अब तक विभिन्न अस्पतालों से रेफर होकर सदर अस्पताल पहुंचे मरीजों की बाबत अस्पताल प्रबंधन का स्पष्ट तौर पर कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है। बच्चों में जब बुखार तेज हो जाता है तो चमकी स्वाभाविक है। बताया गया कि अब तक सदर अस्पताल में भर्ती इस तरह के करीब पांच बच्चों का इलाज किया गया है। जिसमें राजेश्वरी की लक्ष्मी कुमारी, कसहा के प्रियांशु, मानगंज के आर्यन व राघोपुर के एक मरीज शामिल हैं जो सिर्फ बुखार से पीड़ित था। चूंकि अभी वर्तमान में चमकी बुखार को लेकर लोग आशंकित और आतंकित है इसके चलते उन्हें तरह-तरह की आशंका होती है।

सीएस डॉ घनश्याम झा ने बताया कि सदर अस्पताल में अब भी दो मरीज भर्ती है जिसका इलाज चल रहा है लेकिन उसे सिर्फ बुखार था जिसके चलते चमकी आता था। शेष मरीज ठीक होकर अपने घर भी चले गये हैं।

उन्होने कहा कि वैसे भी किसी अप्रत्याशित खतरे को भांपते हुए सदर अस्पताल में चमकी बुखार के मरीज मिलने पर व्यापक इंतजाम पहले ही कर लिए गये हैं। दस बेड का एक वार्ड तैयार किया गया है। जिसमें बच्चों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर को तैनात किया गया है और दवा भी उपलब्ध है। इस तरह के मरीज अगर मिलते हैं तो उसे सदर अस्पताल में बेहतर इलाज की सुविधा दी जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब तक एक भी एईएस (AES) के मरीज अस्पताल नहीं आए हैं। लिहाजा किसी को भी चिंता करने कि आवश्यकता नहीं है, छातापुर के घीबहा में एक बच्चे की मौत पर उन्होंने कहा कि वो मरीज सदर अस्पताल नहीं आया है किस बीमारी से उसकी मौत कहां हुई और कहां उसका इलाज करवाया गया ये जानकारी उन्हें नहीं है।

फिलहाल सदर अस्पताल के चमकी बुखार से लड़ने के लिए तैयार रहना वर्तमान समय में बड़ी बात है। वहीं मौके पर मौजूद शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ विनय कुमार ने कहा कि अब तक चमकी बुखार से पीड़ित एक भी मरीज सुपौल जिले में नहीं मिला है। चूंकि बच्चों को तेज बुखार के बाद चमकी आ जाता है जो स्वाभाविक है। लिहाजा लोग उसे चमकी बुखार समझ लेते हैं जो नासमझी है। बुखार से पीड़ित बच्चों का इलाज करने पर वो ठीक हो जाता है।