चीनी मिल मालिको का किसानो पर कहर

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बेतिया- बिहार के 28 चीनी मिलों में 5 चीनी मिल चंपारण में अवस्थित है जहां के हजारी यानी की एक हजार किसान बैलगाड़ी पर गन्ने को बैल और पाड़ा के सहारे चीनी मिल के जिस जगह पर एकत्रित होते है उसे हजारी बोलते है। इसी हजारी में किसानो को अपने सवारी और जानवर के साथ चीनी मिल के अंदर प्रवेश करने मे 2 से 3 दिनो तक कपकपाती ठंड में खुले आसमान के नीचे समय गुजारनी पड़ती है।

यहां के चीनी मिलों के द्वारा किसानो पर हो रहे जुल्म मे सबसे अवव्ल नंबर नरकटियागंज के न्यू स्वदेसी शुगर मिल का है जिसके हजारी में जानवर और किसान में फर्क समझना मुश्किल है हम ऐसा इसलिए कह रहे है की एक हजार सवारी बैल के साथ किसान से किसान के लिए बने किसान सेड़ को मिल अपने खाद का बोरा रख गोदाम के लिए कब्जा कर ठंड मे किसानो को मरने के लिए छोड़ दी है वो भी दो चापकल के सहारे, जहां किसानो के लिए खाना का कैंटीन सस्ते दाम पर मिल मुहैया नहीं करा सकी। वहां जानवरो की खाना देने की बात बेईमानी ही है, इस ठंड के मौसम में किसान अपना और जानवर का खाने और आग की व्यवस्था खुद करती है

पश्चिम चंपारण के 70% किसान 13 अगस्त को आए भयंकर बाढ़ में पहले ही धान की फसल को खो दिए है। यही वो किसान है जो आज की तारीख में मजबूर है, और मजबूर होकर बोलते है की “अब तो गन्ना के सहारा बा”और चीनी मिल है की सरकार के प्रोटोकाल का धज्जियां उड़ाकर किसानो पर जुल्म करने बाज नहीं आती। इन सारे सवालो को न्यू स्वदेसी शुगर मिल नरकटियागंज के executive vice president “ashish khanna” के समक्ष हजारी में हो रहे किसानो के साथ जुल्म के बारे में रखा तो- झट से सरकार के प्रोटोकाल पर कहा की कोई कंपनी किसान कैंटीन नहीं देती ,किसानो के लिए बने किसान सेड़ बाढ़ आने की वजह से अपने लिए इस्तेमाल कर रहे है जिसको खाली कर देंगे, चार चापकल और लगवा देंगें।

पर सवाल है की खन्ना साहब “कब” जब मिल बंद हो जाएगा तब, इतने बरसो से मिल चल रही है किसानो के प्रति पोजीटिव सोच मीडीया ने सवाल रखा क्या तब ध्यान आया ? यह है पश्चिम चंपारण नरकटियागंज ग्राम –पोखरिया के महिला किसान रबड़ देवी जो अपने 5 बच्चो के साथ गन्ने के खेत में गन्ने को काट रही जिसमें बच्चे भी सहयोगी है जो बोलते है सभी धान का फसल बर्बाद हो चुका है अब गन्ने एक सहारा बा , गन्ना जल्दी से गिर जाईत त वोकार पैसा से चावल दाल खरीदकर परिवार चलित।

दूसरे किसान अमरुल होड़ा जो अपने गन्ने को तबा-तोड़ काट रहे है और बोलते है चीनी मिल से मेरे नाम का पुर्जा-चालान आने में अभी देर है पर परिवार को चलाने के लिए जल्दबाज़ी में दूसरे के नाम के पुर्जी-चालान पर गन्ना को गिरने की बात बोलते है और यह भी बताते है की हजारी में तीन दिन तक अपना खाना बैल का खाना और आग की व्यवस्था का इंतजाम खुद करना पड़ता है।

यही वो हजारी है जहां पर एक हजार किसान बैल गाड़ी के सहारे अपने खेत से गन्ना को काटकर गन्ने को लेकर इस जगह यानी की हजारी में एकत्र होते है और चीनी मिल के द्वारा हुए बदइंतजामी को 2 से तीन रात तक खुले में ठंड से जूझते है क्योकि जो किसान के नाम किसान सेड़ बना था उसको मिल द्वारा कब्जा कर लिया गया है, और यही दो चापकल के सहारे एक हजार किसान अपनी बारी का इंजार करते है पानी पीने के लिए, जहां बैल गाड़ी को चला रहा किसान कहता है की हमलोग अपना खाना पीना और कम्बल खुद लाते है। यही न्यू स्वदेसी चीनी मिल नरकटियागंज के हजारी का पुराना गार्ड है जो 10 बरस से कार्यरत है जो स्वीकारता है की एक हजार किसान पर यहां दो ही चापकल है और किसान अपना भोजन एवं कम्बल से ठंड का बचाव करते है।

चीनी मिल के द्वारा किसानो पर हो रहे अत्याचार पर भारतीय किसान मंच के जिला संयोजक एवं संरक्षक नाम है विनय कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा है कि किसान के लिए किसान सेड़ को मिल अपने कब्जे में ले ली है , स्वक्छ जल के नाम पर छलावा, सस्ते दाम पर किसानो के लिए कोई किसान कैंटीन का नहीं होना, और हजारी में पक्की सड़क नहीं होने कारण प्रदूषण जैसे बातो को रख – चीनी मिल सरकार के प्रोटोकाल का धज्जियां उड़ा रही है। जब इन सारी बात को न्यू स्वदेसी सुगरमिल नरकटियागंज के executive vice president के समक्ष रखा गया तो जवाब भी घिसा पिटा मिला। new स्वदेशी शुगर मिल, नरकटियागंज [executive vice president, k.k birla group of sugar companies]
माह चीनी मिल ही चलती है और कई बरसो से चल रही है जब किसानो के दर्द का सवाल रखा तो कंपनी को अपनी गलती का एहसास हुआ, और कहा की जो कब्जे में गोदाम है उसको किसानो के लिए खाली कर देंगे ,चार और चापकल लगवा देंगे ,कैंटीन अगर कोई कंपनी देती है तो प्रयसरत रहेंगे जैसी बात बोलते है , पर सवाल है की ये सब होगा कब जब मिल बंद हो जाएगी तब ?