छिन रहा है गरीबों के मुंह से निवाला

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सहरसा। सहरसा रेलवे रैक पॉइंट पर हजारों बोरे गेंहूँ बारिश में भींगकर बर्बाद  हो रहे हैं। बीते 10 जुलाई से रैक पॉइंट पर रखे गेंहूँ का आज तक उठाव नहीं हो सका। बारिश में भींगकर गेंहूँ सड़ गया। 51 हजार 8 सौ 71 बोरे गेंहूँ पंजाब के अम्बाला से मंगाए गए थे गरीबों के लिए लेकिन गरीबों तक पहुँचने से पहले सड़कर बर्बाद हो गए। लापरवाही, बदइन्तजामी और बदमिजाजी की इंतहा हो गई। आखिरकार गरीबों के साथ यह कैसा खेल खेला जा रहा है ?

गरीबों के साथ अनदेखी और खिलवाड़ का सिलसिला बदस्तूर जारी है. गरीबों को सस्ते दर पर राशन उपलब्ध कराने की गरज से मंगाए गए हजारों क्विंटल गेहूं ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर और रेल अधिकारियों की लापरवाही से सहरसा रेलवे रैक पॉइंट पर बारिश में भींग-भींगकर बर्बाद हो गए। बीते 10 जुलाई को 51 हजार 8 सौ 71 बोरे गेंहूँ पंजाब के अम्बाला से मंगाए गए थे जिसे गरीबों के बीच सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जाना था लेकिन इसे रैक पॉइंट प़र खुले आसमान के नीचे रख दिया गया। तेज बारिश में सारा गेंहूँ भींगता रहा लेकिन उसे बचाने का किसी ने प्रयास नहीं किया और आखिरकार वही हुआ जिसका डर था। हजारों क्विंटल गेंहूँ देखते-देखते यूँ ही सड़कर बर्बाद हो गया। गरीब तो गेंहूँ नहीं खा सके अब सड़े हुए गेंहूँ को रैक पॉइंट प़र सुअर और बकरी खा रहे हैं। यही नहीं सड़े हुए गेंहूँ को अब यहाँ से उठाकर ट्रक प़र लादकर सरकारी गोदामों में ले जाया जा रहा है, जहां इसका मिलावट अच्छे गेंहूँ में करके खपाने की गहरी साजिश की जायेगी। वैसे बहुत सारे गेंहूँ को विभिन्न इलाके में फेंका भी गया है. समझ में नहीं आता कि आखिर इस तरह से अनाज को सड़ाकर किसका भला किया जा रहा है। सरकार और समूचा तंत्र इस जानलेवा और बर्बादी से सनी लापरवाही को आखिर क्यों मूक और बधिर बना देख रहा है।