जदयू ने मनाया स्व0 जगदेव प्रसाद का 44वाॅं शहादत दिवस

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पटना – बिहार प्रदेश जनता दल (यू0) के प्रदेश कार्यालय, वीरचन्द पटेल पथ पटना में स्व0 जगदेव प्रसाद का 44वाॅं शहादत दिवस मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता पार्टी के राज्य कार्यकारिणी सदस्य नन्दकिशोर कुशवाहा ने किया।कुशवाहा ने अपने भाषण में कहा कि जगदेव प्रसाद का जन्म 2 फरवरी 1922 को हुआ और शोषितों की आवाज उठाते हुए 5 सितम्बर 1974 को वे शहीद हो गए। बिहार प्रान्त में जन्मे वे एक क्रन्तिकारी राजनेता थे। इन्हें ‘बिहार लेनिन’ के नाम से जाना जाता है। जगदेव बाबू को बिहार लेनिन उपाधि हजारीबाग जिला में पेटरवार (तेनुघाट) में एक महती सभी में वहीं के लखन लाल महतो, मुखिया एवं किसान नेता ने अभिनन्दन करते हुए दी थी। बोधगया के समीप कुर्था प्रखंड के कुराहरी गांव में जगदेव प्रसाद का जन्म 2 फरवरी 1922 को हुआ। उनके पिता का नाम प्रयाग नारायण और माता का नाम रसकली देवी था। पिता स्कूल में शिक्षक थे और माता गृहणी।

बता दें कि 05 सितम्बर 1974 को कुर्था में जनसभा दौरान जगदेव बाबू की हत्या कर दी गई। उस दिन रैली में में बीस हजार लोग जुटे थे। जगदेव बाबू ज्यों ही लोगों को संबोधित करने के लिए बाहर आए पुलिस प्रशासन के मौके पर मौजूद अधिकारी ने जगदेव बाबू को गोली मारने का आदेश दिया। समय अपराह्न साढ़े तीन बज रहे थे। 27 राउंड गोली फायरिंग की गई जिसमें एक गोली बारह वर्षीय दलित छात्र लक्ष्मण चैधरी को लगी और दूसरी गोली जगदेव बाबू के गर्दन को बेधती हुई निकल गई। जगदेव बाबू ने ‘जय शोषित, जय भारत’ कहकर अपने प्राण त्याग दिए। सत्याग्रहियों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने धरना देने वालों पर लाठी चार्ज किया। उसी दिन बीबीसी लन्दन ने पौने आठ बजे संध्या के समाचार में घोषणा किया कि बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद की हत्या शांतिपूर्ण सत्याग्रह के दौरान कुर्था में पुलिस ने गोली मारकर कर दी।

शिक्षा मंत्री कृष्णनन्दन वर्मा ने कहा कि पटना आकर जगदेव प्रसाद समाजवादियों के साथ आन्दोलन में शामिल हो गए। 1957 में उन्हें पार्टी से विक्रमगंज लोकसभा का उम्मीदवार बनाया गया मगर वे चुनाव हार गए। 1962 में बिहार विधानसभा का चुनाव कुर्था से लड़े पर विजयश्री नहीं मिल सकी। वे 1967 में वे कुर्था विधासभा से पहली बार चुनाव जीते। इसी साल उनके अथक प्रयासों से स्वतंत्र बिहार के इतिहास में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी और महामाया प्रसाद सिन्हा को मुख्यमंत्री बनाया गया। पहली गैर-कांग्रेस सरकार का गठन हुआ। बाद में पार्टी की नीतियों तथा विचारधारा के मसले पर उनकी राम मनोहर लोहिया से अनबन हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दलित-पिछड़ों को आरक्षण देकर बिहार लेनिन स्व0 जगदेव प्रसाद के सपनों को साकार करने का काम किये हैं।

उक्त अवसर पर शिक्षा मंत्री कृष्णनन्दन वर्मा, बिहार विधान परिषद के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रवीन्द्र प्रसाद सिंह, विधायक रमेश सिंह कुशवाहा, विधायक वशिष्ठ सिंह, विधान पार्षद सी0पी0 सिन्हा, मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह पूर्व स0वि0प0, प्रवक्ता नीरज कुमार स0वि0प0, मुख्यालय प्रभारी डाॅ0 नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, चन्दन कुमार सिंह, मृत्युंजय कुमार, पार्टी प्रवक्ता डाॅ0 अजय आलोक, अंजुम आरा, निखिल मंडल व अरविन्द निषाद, रूदल राय, विरेन्द्र कुमार कुशवाहा, विद्यानन्द विकल, ओमप्रकाश सिंह सेतु, राजेन्द्र सिंह जार्ज, हेमन्त कुमार, शिवशंकर निषाद, भगीरथ कुशवाहा, विजय कुमार कुशवाहा, मुन्ना चौधरी सहित सैकड़ों नेता एवं कार्यकत्र्ता उपस्थित थे।