जब नालंदा खंडहर में पहुंची राज माता परिवार के साथ

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राजगीर: भूटान की राजमाता दोजी ओंगचुक शनिवार को प्राचीन नालंदा विवि का भग्नावशेष देखने नालंदा पहुंचीं। वहां से लौटकर महारानी ने बताया कि उनका नाती जिग्मी जिटेन ओंगचुक जब एक साल का था तब से ही प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी का नाम लेता था। पहले तो हम सभी को कुछ समझ में नहीं आया। जब कुछ और बड़ा हुआ तो उसने बताया कि पिछले जन्म में उसने यहां पढ़ाई की है।

नालंदा खंडहर में जब राज माता परिवार के साथ पहुंची तो वहां उनके नाती जिग्मी जिटेन ओंगचुक ने कुछ अलग ही गतिविधि शुरू कर दी। वह खंडहर में मौजूद विभिन्न अवशेषों और संरचनाओं के बारे में बताने लगा। यहां तक कि उसने यह भी बताया कि पिछले जन्म में वह किस कमरे में पढ़ाई करता था।

पहले तो उसने काफी भाग-दौड़कर कमरे का भग्नावशेष खोजा। उसके बारे में जानकारी दी कि वह यहीं पढ़ता था। उसने सोने वाला कमरा भी दिखाया।

राज माता और उनके साथ आए लोगों को स्तूप सहित कई ऐसी संरचनाएं देखने को मिली जिसके बारे में वह भूटान में बताया करता था। वहां वह एक रास्ते और ऊंची जगह के बारे में बताता था। यहां आकर उसे भी खोज लिया।

महारानी ने बताया कि भूटान में वह जो भी बताता था उसकी सारी बातें यहां सच निकल रही है। उन्होंने बताया कि वह भूटान में यहां आने के लिए जिद भी करता था। वह आठवीं शताब्दी के बारे में सारी बात बताता है।

बता दें कि राजमाता के साथ इस दौरे पर पुत्री सोनम देझेन ओंगचुक और तीन साल का नाती जिग्मी जिटेन ओंगचुक और इसका छोटे भाई सहित 16 सदस्यीय दल है।

श्रोत: भास्कर