जब प्रेमी जोड़े ने बापू की प्रतिमा को साक्षी मान लिए सात फेरे

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आरा: आपने अब तक शादी के कई किस्से कहानी सुने होंगे। शादी में जहां लोग भगवान को साक्षी मान कर सात फेरे लेते है वहीं एक ऐसे जोडे ने भगवान और कानून की जगह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को साक्षी मान कर शादी रचा ली। यह घटना बिहार के आरा जिले की है। जहां बुधवार को ऐसी अनोखी शादी कर प्रेमी जोड़े ने समाज को एक संदेश देने की कोशिश की।

प्रेम-प्रसंग में हुए इस विवाह को लेकर कानूनी अड़चने भी थीं तो पुलिस का एक जवान रिश्तों को बनाने के क्रम में कन्यादान तक कर गया।

दरअसल आरा के जिला स्कूल के पास रहने वाली गुड़िया और जेल रोड निवासी सन्नी दोनों शहर के सदर अस्पताल में एनजीओ के माध्यम से सफाई कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ा, मिलने जुलने का दौर शुरु हुआ और फिर दोनों ने हमेशा के लिए एक होने की कसमें खाई।

जब दोनों बालिग ने शादी का फैसला किया तो परिवार वालों ने ऐतराज जताया। घरवालों की मनाही के बावजूद दोनों ने सच्चे प्रेमी-प्रेमिका की तरह वक्त का इंतजार किया और जिस सदर अस्पताल में दोनों काम करते थे उसी को शादी का मंडप बनाया।

बुधवार को आरा के अस्पताल परिसर स्थित बापू के स्मारक के पास हुई यह शादी चर्चा का केंद्र रही। अस्पताल के तमाम कर्मचारी बाराती की भूमिका में थे और पूरे विधि विधान से शादी की रस्म निभाई गई।

शादी में लड़की के घरवाले तो नहीं आए लेकिन लड़के के पिता ने वहां पहुंचकर वर-वधु को आशीर्वाद दिया। लड़की का कन्यादान करने के लिए एक पुलिस वाला सामने आया और शादी में बाप की भूमिका को निभाया।

इस अनोखी शादी को देखने के लिए अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके रिश्तेदार भी खड़े रहे। वहीं लोगों ने प्रेमी जो़ड़े की शादी करवाने वाले हवलदार मंगीत राम के पहल की भी खूब सराहना की।

आपको बता दें कि गुड़िया की 10 वर्ष पहले भी ब्रह्मदेव राम से शादी हुई थी। लेकिन शादी के दो वर्ष बाद उसके पति की मृत्यु बीमारी से हो गई थी। गुड़िया को एक बेटा है। वह अपने बेटे के साथ ही रहती थी। फिर जिंदगी के सफर में सन्नी से मुलाकात होने के बाद उसने फिर से घर बसाने का फैसला लिया। आठ वर्ष का उसका बेटा भी इस शादी का गवाह बना।