जरा याद करो कुर्बानी

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जिन्होंने पूरे देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी आज उनके स्मारक के लिए थोड़ी सी जमीन तक नहीं है। १९४२ में शहीद हुए सात वीर जवानों में से एक शहीद राजेन्द्र सिंह की प्रतिमा नगर परिषद् कार्यालय मोड़ के पास कब स्थापित की जायेगी? उक्त सपने को संजोये स्व० सिंह की पत्नी सुरेश देवी अब जीवन के अंतीम पड़ाव पर खड़ी हैं। अपने अंतिम इच्छा को पूर्ण करने को लेकर आलाधिकारियों से जाकर मिलीं। लेकिन अभी तक निराशा ही हाथ लगी है। अगर राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने पहाड़ के समान भारी मौत का वरण किया तो उनकी पत्नी सुरेश देवी ने उनकी स्मृति के सहारे अपनी पहाड़ सी जिन्दगी काट दी। दानापुर दियारा के अकिलपुर थाना के दूधिया निवासी कालिका सिंह की पुत्री सुरेश देवी का विवाह १९४२ के मई महीना में सारण जिले के बनवारीचक निवासी शिव नारायण सिंह के पुत्र राजेन्द्र सिंह से हुई थी। तब सुरेश देवी को क्या पता था कि उनके पति तो मां भारती के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वालों की टोली में शामिल हैं। शादी के कुछ ही दिनों बाद सुरेश देवी ससुराल से वापस मायके आ गईं। वह अभी अपनी दुनिया बसाने के सपने ही संजो रही थी कि उन्हें पति के शहीद होने की खबर मिल गई। १३-१४ वर्ष की उम्र में विवाह होने और ठीक दो महीने बाद ११ अगस्त १९४२ को उनके सामने वैधव्य का पूरा जीवन खड़ा हो गया। लेकिन शहीद की मौत जितनी गौरवमयी होती है उसके विधवा का जीवन भी उअतना ही महान होता है। इस घटना के बाद सुरेश देवी ने अपने शहीद पति की यादों के सहारे जिंदगी गुजार दी। समय बदलने के साथ-साथ सुरेश देवी अपने मायके की ही बनकर रह गईं। आज वर्षों से दानापुर के खगड़ी रोड में कदमतल में वह सपरिवार रहती हैं। कहने को तो उनके पास सबकुछ है लेकिन सुरेश देवी के मन में एक तमन्ना है कि नगर परिषद मोड़ के पास पति की प्रतिमा की स्थापना हो जाये और कदमतल मार्ग को राजेन्द्र सिंह मार्ग के नाम से जाना जाए। इसके लिए प्रतिमा भी उन्होंने बनवाकर हुई है। बीते वर्ष ११ अगस्त को “हिन्दुस्तान” ने “गुमनामी में जी रही शहीद की पत्नी” शीर्षक से समाचार छापा। तब समाचार का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी जितेन्द्र कुमार सिंह दानापुर आए और अनुमंडलाधिकारी बी कार्तिकेयन समेत अन्य अधिकारियों से मिलकर स्थापना को लेकर नगर परिषद कार्यालय मोड़ के पास स्थल का निरीक्षण किया। उस वक्त वर्षों बाद सुरेश देवी के चेहरे पर एक जीत की खुशी देखी गई थी। जब प्रखंड विकास पदाधिकारी डा० शोभा अग्रवाल ने उन्हें गांधी मैदान में आयोजित होनेवाली झंडोत्तोलन में साथ चलने की बात कही थी। उसके बाद किसी ने प्रतिमा स्थापना को लेकर पहल तक नहीं की। सुरेश देवी के पोते विक्की और संजय आज भी प्रतिमा स्थापना को लेकर प्रयासरत है। उनकी माने तो खगड़ी रोड कदमतल क्षेत्र विकास में काफी पिछड़ा है।

 

हिन्दुस्तान