पटना की पत्थर की मस्जिद इंडो-इस्लामिक कला का बेजोड़ नमुना

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पटना: पटना के सुलतानगंज थाना अंतर्गत अशोक राजपथ से गंगा के पर पत्थर की मस्जिद इंडो-इस्लामिक कला का बेजोड़ नमुना है। इस मस्जिद को चिम्मी का भी मस्जिद कहा जाता है। इसका एक और नाम है सैफ की मस्जिद। पटना की यह सबसे पूरानी मस्जिद है। इस मस्जिद को जहांगीर के पुत्र शहजादा परवेज ने बनवाई थी। शाहजादा परवेज सन 1621 से 1624 तक बिहार के सूबेदार (गवर्नर) थे।

अपने शासनकाल में ही उन्होने इसकी बुनियाद डाली, परन्तु निर्माण कार्य उसके मरने के बाद सन 1625 (हिजरी 1036) में पूरा हुआ। पूरी मस्जिद पत्थर से बनी है, इसलिए पत्थर की मस्जिद कहते है। इसमे तीन गुंबद है। मस्जिद छोटी लेकिन आकर्षक है। ऊंचे पर स्थापित इस मस्जिद से ही एक बड़े इलाके की पहचान है। यहां नेमाज अदा की जाती है। देश-विदेश से लोग इस मस्जिद को देखने आते है। इसकी छोटी-बड़ी मीनारें दूर से ही लोगों को आकर्षित करती है।

गंगा के किनारे और हरमंदिर तख्त साहब के पास स्थित पत्थर की मस्जिद पिछले चार सौ साल से धार्मिक सौहार्द का मिसाल पेश करता रहा है। पत्थर की मस्जिद को स्थानीय इस्लामी समुदाय द्वारा व्यापक रूप् से सम्मान दिया जाता है। मुगलकाल में गंगा से आने वाले राजा यहां का भ्रमण करते थे। अंग्रेजों का भी यहां आना- जाना रहा। विदेश के पर्यटक भी इसे देखने को आते थे।