जहां मिला था अहिल्या को त्राण

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छपरा मुख्यालय से सटा पौराणिक गोदना सेमरिया (वर्तमान का रिविलगंज) बिहार का एकमात्र स्थान है जहाँ मर्यादा पुरुषोत्त्म  भगवान श्रीराम सहित कई ऋषियों की कथा एक साथ जुडी हुई है। वाल्मीकि रामायण में इस स्थान का संपूर्ण वर्णन है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर महर्षि गौतम के श्राप से पत्थर बनी उनकी पत्नी अहिल्या का उद्धार भगवान श्रीराम ने किया था। मर्यादा पुरुषोत्त्म भगवान श्रीराम, अपने अनुज लक्ष्मण व कुलगुरु विश्वामित्र जी के साथ अयोध्या से धनुष यज्ञ में भाग लेने के लिए जनकपुर जा रहे थे। जाने के क्रम में ही बक्सर के जंगल में तारकासुर का वध कर इसी रास्ते से सरयु नदी घाट से जाने के क्रम में भगवान श्रीराम का पैर अचानक उस सिलापट्ट से जैसे ही स्पर्श हुआ तभी वो पत्थर नारी का रूप ले खड़ी हो गई। वह दिन कार्तिक पूर्णिमा का ही दिन था जिस दिन अहिल्या का उद्धार हुआ था। 
एक अन्य तथ्य यह भी है कि महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या और पुत्र सतानन व पुत्री अंजनी थी। वीर हनुमान अंजनी के पुत्र होने के इस नाते यह स्थान वीर हनुमान के ननिहाल के रूप में भी जाना जाता है। इसका उल्लेख कई शास्त्रों में भी किया गया है।
रिविलगंज में कार्तिक पूर्णिमा के दिन लाखो लोग नहान के लिए इस घाट पर एकत्रित होते है जहाँ अहिल्या का उद्धार हुआ था और अहिल्या की तरह पाप और शाप से मुक्ति के लिए स्नान करते हैं जिसे कार्तिक नहान के नाम से भी जाना जाता है। महर्षि गौतम का आश्रम गोदना में जब श्रीराम आये थे और पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार हुआ था तभी जिस स्थान पर प्रभु श्रीराम का पदचिन्ह उभरा था उसे आश्रम में आज भी उसी तरह संजो कर रखा है। महिलाएं आज भी श्रद्धापूर्वक इस स्थान के साथ उस पदचिन्ह को भी पूजती हैं।