जिसने पाप ना किया हो…

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हर गलती करने वाले को खुद को सुधारने का मौका जरुर मिलना चाहिए। हालांकि ये गलती किस प्रकार की है इस पर निर्भर करता है। जिस प्रकार से एक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित बाल कलाकार (जो अब युवा अभिनेत्री है) का नाम तस्वीरों के साथ मीडिया में पिछले दिनों छाया रहा क्योंकि वो वेश्यावृत्ति में रंगे हाथों संलिप्त पायी गयी, इससे मन में कई सवाल कौंधते हैं। और वो भी तब जब उसने अपनी गलती को आसानी से स्वीकार किया।

यूं ही ख्याल आया कि अगर वह आत्महत्या कर बैठी तो? जिस तरह से उसका नाम उजागर हुआ, ये काफी शर्मिंदगी भरा हो सकता है किसी के लिए। लोग जरुर कह सकते हैं कि अगर लोक-लाज की इतनी ही चिन्ता होती तो क्या यही सब धंधा करती? पर क्या चुनाव सही या गलत नहीं हो सकते ? और हम यह भी तो कह सकते हैं कि वो भटक गई है। क्या समाज की जिम्मेदारी उस भटकी हुई लड़की को सही रास्ते पर लाना नहीं है ? कानून भी तो यही कहता है।

हम फिर से उसी सवाल पर आते हैं। क्या अगर इन सब दबावों की वजह से उस लड़की ने आत्महत्या कर लिया तो? ऐसा तो हो ही सकता है। क्यूंकि वह लड़की तो किसी को मुंह दिखाने लायक रही नहीं। सोशल मीडिया ने इस खबर को अपनी व्यापकता दे दी है। उसकी ये काली करतूत उसका कभी भी पीछा नहीं छोड़ेगी। ऐसे में उसके सामने बहुत कम रास्ते हैं। अगर उसने फिर से गलत चुनाव किया, तो उसकी जिम्मेवारी किसकी होगी ? क्या यह आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा नहीं है? मीडिया इस खबर को ढके-तुपे अंदाज में भी तो दिखा सकता था। पहले भी तो ऐसा हो ही चुका है जब एक बड़े न्यूज़ चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन कर कुछ अभिनेत्रियों और मॉडल को इस धंधे में संलिप्त पाया था। पर चैनल ने कभी भी उनका नाम नहीं लिया। यहां तक खबर आई थी कि एक मॉडल ने किसी बड़े पुलिस अधिकारी को धमकी दी थी कि अगर ये बात लोगों को पता चली तो वो आत्महत्या कर लेगी।

सवाल यह भी है कि जो सफेदपोश उस लड़की के साथ पकड़े गए उनके नाम और चित्र क्यूं नहीं सामने आए ? वाकई मीडिया ने उस लड़की को बहुत बड़ी सजा दी है ! इससे शायद ही वो उबर पाए । मीडिया के पत्थर से वो पापिन बच नहीं पाई। लहुलुहान होती रही और हम सब दर्शक बनने के लिए मजबुर हुए। पर पहला पत्थर फेंकने से पहले क्या ख्याल किया किसी ने कि वे कितने दुध के धूले हैं ?