जीवनशैली में बदलाव लाने पर रोक सकते हैं ब्लड प्रेशर की बीमारी

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अवध कर्ण

पटना – गीतांजली इंस्टिच्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के एक पार्ट के रूप में सुपर स्पेशलिटी किडनी क्लीनिक के उद्घाटन समारोह का आयोजन रविवार को होना तय है। जिसकी अध्यक्षता स्वयं स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय व सांसद व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय करेंगें। विशिष्ट अतिथि के रूप में संजीव चौरसिया व उषा विद्यार्थी होंगी शामिल।

इस संस्था के संस्थापक उपेन्द्र कुमार सिंह का एक मात्र सपना था कि इस संस्था को एक ऐसे जगह पर खोला जाय जहाँ से निराश लोगों को हम लाभ पहुँचा सके। इसलिए इन्होंने इस संस्था की नींव के लिए आईजीआईएमएस के बगल में खोलने का निर्णय किया है।

इस बीमारी से ग्रसित लोगों को इससे क्या लाभ होगा इस बात को प्रेसवार्ता में साझा करते हुए डॉ. हेमंत कुमार वरीय किडनी रोग विशेषज्ञ का कहना है कि किडनी की बीमारी जीवन शैली से सीधे संबंधित है। जीवनशैली में बदलाव लाने पर ब्लड प्रेशर की बीमारी को रोका जा सकता है।

जीवनशैली में बदलाव लाकर किडनी की बीमारी को रोका जा सकता है। जो एक सरकार के सामने बहुत बड़ा आर्थिक संकट के रूप में खड़ा हुआ है, इस बीमारी से क्वालिटी ऑफ़ लाइफ काफी कंप्रोमाइजड हो जाता है। केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से किडनी की बीमारी के रोकथाम इलाज की ओर काफी अच्छा पहल किया गया है, जो एक सराहनीय कदम है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सक बंद मरीजों के इलाज से थोड़ा समय निकालकर अगर मरीजों को किडनी बीमारी के रोकथाम पर थोड़ी चर्चा करें तो इस बीमारी पर काफी हद तक काबू प्राप्त किया जा सकता है। हिंदुस्तान दुनिया का एक ऐसा देश है जहां चिकित्सक के पुर्जे के बिना ही दवा के दुकानों से मनचाहा दवा मरीजों को उपलब्ध हो जाता है।

इसका दुष्परिणाम यह है कि बहुत सारी दवाएं ऐसी है जो किडनी पर बहुत बुरा असर डालती है। एवं इसमें अपरिवर्तनीय बदलाव आ जाता है जो किडनी के मरीजों को अंततः डायलिसिस एवं गुर्दा प्रत्यारोपण की राह की ओर अग्रसर कर ले जाता है।

इसलिए इनका सुझाव है कि सरकारी तंत्र से इस तरह सामान्य लोगों में अगर इन तीनो बीमारियों पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया जाए तो बहुत हद तक किडनी की विभिन्न बीमारियों का रोकथाम संभव हो सकता है। उन्होंने इस क्लीनिक के उद्देश्य को साझा करते हुए कहा कि लोगों के बीच इस महत्व को बताना है ताकि किडनी की बीमारियों से बचाव किया जा सके। क्योंकि एक बार किडनी की बीमारी हो जाने पर यह अग्रसर बढ़ता जाएगा।

इसका एकमात्र उद्देश्य है कि कुछ नए गुणवत्ता भरे दवाओं की उपलब्धता का सेवन अगर किडनी मरीज करें तो किडनी की बीमारी के रफ्तार को कम किया जा सकता है। जिसके फलस्वरूप जीवन की गुणवत्ता बढ़ेगी एवं डायलिसिस तथा गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता को दूर किया जा सकेगा। इनके द्वारा क्लीनिकल शोध में पाया गया है कि बिहार के लगभग 12 करोड़ की आबादी में औसतन सवा करोड़ लोग किसी ना किसी प्रकार के किडनी रोग से ग्रस्त हैं। इनका कहना है कि कोई गरीब व्यक्ति भी अगर आता है तो उसके बातों को मानते हुए उसे मुफ्त परामर्श दिया जायेगा।