जुर्म का दामन छोड़ कलम थामेंगी ये महिलाएं

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मुजफ्फरपुर: दो साल से जेल में बंद ललिता के लिए किताबें और पढ़ाई बचपन से सपना रहा। वह जुर्म से दूर होकर शिक्षा की रोशनी से अपने जीवन में उजियारा लाना चाहती है। यहां मनोरमा, सुमित्रा, पुष्पा, मंजू जैसी 30 महिलाओं में शिक्षा से जुड़ने की ललक हैं। इनके अंदर यह ललक जगायी है इनरव्हील क्लब ऑफ मुजफ्फरपुर जागृति ने।

खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा में बुधवार को एक अनोखी पाठशाला की शुरूआत इन महिलाओं के नामांकन के साथ हुई। इन्हें पढ़ाने के लिए 41 बंदी महिलाओं के बीच सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे की खोज हुई तो एक महिला इंटर पास मिली। 10 साल की सजा पाने वाली पप्पू पिछले चार साल से जेल में है। इंटर पास पप्पू को क्लब ने इन बंदी महिलाओं की शिक्षिका बनाया है।

क्लब की अध्यक्ष निर्मला साहू, सचिव डॉ. भारती सिंह ने कहा कि इन महिलाओं को एक साल तक पढ़ाया जाएगा। शिक्षिका बनाई गई महिला को क्लब की ओर से वेतन भी दिया जाएगा।

क्लब की आरएलसी रितुराज ने कहा कि इन महिलाओं को शिक्षण सामग्री क्लब की ओर से दी जाएगी। हर सप्ताह क्लब की सदस्य इसकी मॉनिटरिंग करेंगी। इन महिलाओं की समय-समय पर परीक्षा ली जाएगी। इन्हें सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। क्लब की अन्य सदस्य गरिमा, सपना, अलका, डॉ. रागिनी रानी ने कहा कि साथ में इन महिलाओं के बच्चों को भी पढ़ाया जाएगा।

सभार: हिन्दुस्तान